आदिवासी परिवार के इस बेटी को है मदद की दरकार

आदिवासी परिवार के इस बेटी को है मदद की दरकार

आदिवासी परिवार के इस बेटी को है मदद की दरकार



गरियाबंद :- जिले के सामाजिक कार्यकर्ता हरीश यादव (जिला कांग्रेस  पदाधिकारी )ने जानकारी देते हुए बताये की  छुरा के रसेला ग्राम में गरीब आदिवासी परिवार सुरेश मरकाम के घर 9 साल पहले पैदा हुई बेटी की बदकिस्मती कहे या फिर प्रशासन कि उदासीनता, बेटी लाचारी की जिंदगी जी  रही है। पिता सुरेश ने बताया कि बेटी के पैदा होने के 6 माह बाद उसके शरीर के अंग काम करना बंद कर दिया l 


 तब बेटी कल्याणी 3 साल की थी। तब 2013 में  उसका इलाज छुरा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र से हुआ। ब्लड सैंपल अम्बेडकर अस्पताल भेजा गया तो रिपोर्ट में बताया गया कि उसे एक्युट फ्लोसिस पैरालिसिस हो गया है। 


 *सरकार से मदद की आस लगाए हैं परिवार* 


दादा नाथू राम ने कहा कि उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है . इलाज नहीं कर सकते . पोती को नित्यकर्म से लेकर हर काम के लिए उठा के ले जाना पड़ता है। शारीरिक कमजोरी इतनी है कि अभी केवल हड्डी का ढांचा लगती है . दादा ने कहा कि पुराने सरकार ने केवल कार्ड बनाने 8 साल  लग गए। इसलिए और ज्यादा सहयोग की उम्मीद नहीं किया सरकार बदलते की आदिवासी परिवार में उम्मीद की किरण जागी है. परिवार को किसी मशिहा का इंतजार है, जो उनकी बातें सरकार तक ले जा सके। 


 *चरण बाद तरीके से उपचार में हो सकती है ठीक* 


सीएमएचओ एनआर नवरत्न ने कहा की इस स्टेज के पैरालिसिस का उपचार संभव है. चरनबद्घ  तरीके से उपचार मिले तो संभावना बढ़ जाती है. विकलांगता प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी इलाज भी संभव है. अब तक इस पीड़िता की जानकारी विभाग को नहीं मिली है. जानकारी मंगवा कर आवश्यक कार्य वाई की जाएगी।