टीका नही तो, शिक्षा भी नही --नीलकंठ ठाकुर

टीका नही तो, शिक्षा भी नही --नीलकंठ ठाकुर

टीका नही तो, शिक्षा भी नही --नीलकंठ ठाकुर

 छुरा।  देश व राज्य में स्कूल खोले जाने की चर्चा हो रही है। वही अनेक जगह पर दो अगस्त को स्कुल खोले जाने का निर्णय पंचायत के ग्राम सभा में लिया गया है। 

 कोरोना के तीसरी लहर बच्चो के लिए बहुत ही खतरनाक है  ऐसा वैज्ञानिकों, स्पेसलिट डाक्टर के द्वारा बताया जा रहा है। मगर शासन और प्रशासन,, शिक्षक और शिक्षार्थियों को व्यस्त रखना चाह रही है। 

     छ ग राज्य मे  47लाख शासकीय व 13लाख निजी स्कूलो में  छात्र छात्राऐ अध्ययन रत है।  जहा मात्र 10 प्रतिशत पालक, बालक और चालक लोगों ने स्कूल खोले जाने की अनुमति  पसोपेश में  दी है। 

   वही 90 प्रतिशत शिक्षक, पालक एवं छात्र छात्राऐ स्कूल खोले जाने पर सहमत नही है। ऐसे में  शासन प्रशासन स्वयं स्पष्ट आदेश जारी करने में डर रही है। वह इतना डरा हुआ है  कि शाला संचालन के लिए पंच, पालक, बालक और शिक्षक को आगे  कर सहमति  से  खोले जाने की बात कर रही है। 





  जबकी समय की चक्र से सभी भली भाँति परिचित है। ना मोहल्ला क्लास सफल रहा। और ना ही आफ लाईन क्लास  सफल होगा। 

   इस विषय पर  सर्व आदिवासी समाज के प्रदेश प्रतिनिधि, जनपद पंचायत छुरा के जनपद सदस्य व स्थाई शिक्षा समिति के सदस्य नीलकंठ सिंह ठाकुर को पुछे जाने पर कहा कि बच्चे घर व देश का भविष्य है । उन्हे काल के गाल में  डालना गलत निर्यण है। पहले सुरक्षित तो जाये। टीका नही तो, फिर शिक्षा भी नही कहा । जान है  तो जहान है। कोरोना, डेल्टा वरियर्स जैसे प्राण घातक बीमारियों से  बचने पुरी तैयारी हो तब जा कर स्कूल खोलने के बारे में  सोचना सम्भव है। शिक्षा से दूर विलम्ब  शिक्षा का समाधान भी है। नौकरी व व्यवसाय की आयु सीमा को बढ़ाया जा सकता है। 

  वही जनपद पंचायत छुरा के उपाध्यक्ष,शिक्षा स्थाई समिति के अध्यक्ष गौरव मिश्रा ने कहा कि पालकों व शाला विकास समितियों का निर्णय को सम्मान करता हू, पर चीन की कोरोना लहर पुरे दुनिया में  फैल गयी। उसी प्रकार तीसरी लहर को काफी खतरनाक बताया जा रहा है  ,हमें हर तरह से सावधान रहने की जरुरत हैं  बताया।