अपने पति के लम्बी उम्र के लिए सुहागिन महिलाओं ने रखा वट सावित्री व्रत

अपने पति के लम्बी उम्र के लिए  सुहागिन महिलाओं ने रखा वट सावित्री व्रत

अपने पति के लम्बी उम्र के लिए  सुहागिन महिलाओं ने रखा वट सावित्री व्रत


गरियाबंद/छुरा- वट सावित्री व्रत सुहागिनें अपने पति की लंबी आयु का वरदान पाने के लिए रखती हैं।  यह व्रत उतना ही महत्व रखता है जितना करवा चौथ का व्रत. इसमें वट के वृक्ष यानी बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है



इस व्रत में वट वृक्ष यानी बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है। वट वृक्ष को आयुर्वेद के अनुसार परिवार का वैद्य माना जाता है।  प्राचीन ग्रंथ इसे महिलाओं के स्वास्थ्य से जोड़कर भी देखते हैं।  संभवत: यही कारण है कि जब अपने परिवार के स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना हो, तो लोकसंस्कृति में वट वृक्ष की पूजा को प्रमुख विधान माना गया है। 


 सुहागिनें अपने पति की लंबी आयु का वरदान पाने के लिए यह व्रत  रखती हैं. यह व्रत उतना ही महत्व रखता है जितना करवा चौथ का व्रत. इसमें वट के वृक्ष यानी बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है ।इस व्रत में वट वृक्ष यानी बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है। वट वृक्ष को आयुर्वेद के अनुसार परिवार का वैद्य माना जाता है।  छुरा नगर में प्रतिवर्ष यह पूजा सुहागिन महिलाओं के द्वारा उत्साह पूर्वक किया जाता है। छुरा नगर के आउटर में ठूठीमौली चौक में  स्तिथ बरगद पेड़ पर आसपास गाँव की महिलाएं भी यहां पूजा करने आती है ।




वट सावित्री व्रत का उल्लेख पौराणिक ग्रंथों- स्कंद पुराण व भविष्योत्तर पुराण में भी विस्तार से मिलता है। महाभारत के वन पर्व में इसका सबसे प्राचीन उल्लेख मिलता है। महाभारत में जब युधिष्ठिर ऋषि मार्कंडेय से संसार में द्रौपदी समान समर्पित और त्यागमयी किसी अन्य नारी के ना होने की बात कहते हैं, तब मार्कंडेय जी युधिष्ठिर को सावित्री के त्याग की कथा सुनाते हैं ।