एनजीओ की लापरवाही से किसान कैसे उठाएंगे लाभ?

एनजीओ की लापरवाही से किसान कैसे उठाएंगे लाभ?

एनजीओ की लापरवाही से किसान कैसे उठाएंगे लाभ?

लाख कीट प्रशिक्षण एवं संवर्धन के नाम पर खानापूर्ति


दीपक शर्मा/कोरबा/पाली:-केंद्र एवं राज्य शासन द्वारा किसानों,आम जनता को लाभ पहुचाने एवं सशक्त बनाने विभिन्न योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। विभिन्न NGO के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में इसका लाभ पहुचाने का प्रयास भी हो रहा है किंतु जमीनी स्तर पर शासन प्रशासन की मंशा के अनुरूप कार्य नही किया जा रहा है जिससे ग्रामीण क्षेत्र की भोली भाली जनता ठगा महसूस कर रही है। 

 ग्रामीणों को योजनाओं का सही तरीके से जानकारी नही होती, यही वजह है कि उनको आसानी से ठगा जा सकता है और तो और कुछ जनप्रतिनिधि और जागरूक ग्रामीण भी चंद पैसों को लालच में ऐसे NGO का साथ देते हुए  उनका सहयोग करते है। ऐसा ही एक मामला विखं. पाली के ग्राम कर्रानवापारा मे सामने आया है। ग्राम पंचायत के आश्रित मोहल्ला चनवाँरीपारा,कन्हैया पारा,कर्रानवाडीह,करनीयागांव में वर्ल्ड बैंक के द्वारा ESIP को (ICFRE) इंडियन काउंसिल ऑफ फॉरेस्ट्री रिसर्च एंड एडुकेशन के माध्यम से ग्राम मंगल संस्थान सिवनी मध्यप्रदेश को लाख कीट के माध्यम से ग्रामीणों को खेती का प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार उपलब्ध कराने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए लाख - बीज वितरण एवं संधारण हेतु कार्य मिला  है, जिससे उक्त गांव के लगभग 161 कृषक हितग्राहियों का चयन कर लाभान्वित कराना है किंतु ग्राम मंगल संस्थान द्वारा उक्त कार्य से पूर्व किसानों को किसी प्रकार का प्रशिक्षण नही दिया गया है अनुबंध के आधार पर निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा है और मापदंड का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। गुणवत्ता विहीन लाख बीज का वितरण कर खाना पूर्ति कर दी गई,उसमे से कीड़े निकल चुके थे और संचालन की परिस्थिति में लाख अनुसंधान रांची के अनुरूप नहीं है क्योंकि संचालन का कार्य साथ में आईएसआई की जाली में भरकर चढ़ाना था जो कि जाली एवं बनने व चाहने के तरीके के अनुरूप नहीं है,लाख बीज को पेड़ पर लगाने हेतु अगर हितग्राही स्वयं उक्त पेड़ पर चढ़ता है तो उसको मानदेय देना होता है किंतु प्रति पेड़ो के दर से उनको मानदेय भी नही दिया गया, लाख बीज लगाने के पूर्व पेडों को कटाई छटाई एवं सफाई की आवश्यकता होती है किंतु उक्त कार्य भी ग्रामीणों के द्वारा कराया गया है जिन का मानदेय उक्त संस्थान को दिया जाना चाहिए,ग्राम के ग्रामीण हितग्राहियों ने चर्चा के दौरान बताया कि बिना प्रशिक्षण और मानदेय  के कार्य कराया गया है।वही लाख बीज के सही क्वालिटी नहीं होने से लाख कीट प्रभावित हो रहा है। मौके से ग्राम मंगल संस्थान के सदस्य तान सिंह से उनके 9424950846 नंबर पर संपर्क किया गया किन्तु मीडिया कर्मियों के आने की बात सुनते ही उन्होंने अपना मोबाइल बंद कर दिया जिससे उनसे मिडीया कर्मियों की बात नही हो सकी। जिस उद्देश्य से प्रोजेक्ट के लिए शासन ने लाखों रुपए खर्च किया है । ग्राउंड जीरो के निरीक्षण के दौरान वह सही साबित होता नहीं दिख रहा है संबंधित अधिकारियों को इस ओर गंभीरता से ध्यान देते हुए उचित कार्रवाई की आवश्यकता है। जिससे ग्रामीणों को योजना का पूरा लाभ मिल सके।