रेजांगला दिवस के अवसर पर बलरामपुर के यादव समाज द्वारा जमकर ट्विटर पर ट्वीट कर शहीद वीर सपूतों को श्रद्धांजलि अर्पित किया गया..

रेजांगला दिवस के अवसर पर बलरामपुर के यादव समाज द्वारा जमकर   ट्विटर पर ट्वीट कर शहीद वीर सपूतों को  श्रद्धांजलि अर्पित किया गया..

रेजांगला दिवस के अवसर पर बलरामपुर के यादव समाज द्वारा जमकर   ट्विटर पर ट्वीट कर शहीद वीर सपूतों को  श्रद्धांजलि अर्पित किया गया..


रोहित यादव/बलरामपुर :-जिले के यादव समाज के लोगों ने बताया की आज ही के दिन (18 नवंबर) 1962 को लद्दाख के रेजांगला में 124 भारतीय जवानों ने 1300 चीनी सैनिकों को मार गिराया था। 124 भारतीय सैनिकों की अदम्य साहस की ये लड़ाई दुनिया की सर्वोत्तम युद्धों में से एक है। भारतीय सैनिकों ने यह युद्ध लद्दाख की दुर्गम बर्फीली चोटियों पर लड़ा था।


*युद्ध की पूरी कहानी*


18 नवंबर, 1962 की सुबह। लद्दाख की चुशुल घाटी बर्फ से ढंकी हुई थी। माहौल में एक खामोशी सी थी। लेकिन यह खामोशी ज्यादातर तक नहीं रह सकी। 03.30 बजे तड़के सुबह घाटी का शांत माहौल गोलीबारी और गोलाबारी से गूंज उठा। बड़ी मात्रा में गोला-बारूद और तोप के साथ चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के करीब 5,000 से 6,000 जवानों ने लद्दाख पर हमला कर दिया था। मेजर शैतान सिंह के नेतृत्व वाली 13 कुमाऊं की एक टुकड़ी चुशुल घाटी की हिफाजत पर तैनात थी। भारतीय सैन्य टुकड़ी में मात्र 120 जवान थे जबकि दूसरी तरफ दुश्मन की विशाल फौज। ऊपर से बीच में एक चोटी दीवार की तरह खड़ी थी जिसकी वजह से हमारे सैनिकों की मदद के लिए भारतीय सेना की ओर से तोप और गोले भी नहीं भेजे जा सकते थे। अब 120 जवानों को अपने दम पर चीन की विशाल फौज और हथियारों का सामना करना था। हमारे सैनिक कम थे और उनके पास साजोसामान की कमी थी लेकिन उनका हौसला बुलंद था।


 *अहीरवाल क्षेत्र के सैनिक*


13 कुमाऊं के 120 जवान दक्षिण हरियाणा के अहीरवाल क्षेत्र यानी गुड़गांव, रेवाड़ी, नरनौल और महेंद्रगढ़ जिलों के थे। रेवाड़ी और गुड़गांव में रेजांगला के वीरों की याद में स्मारक बनाए गए हैं। रेवाड़ी में हर साल रेजांगला शौर्य दिवस धूमधाम से मनाया जाता है और वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी जाती है।



*रेजांग ला नाम क्यों पड़ा?*


रेजांग ला जम्मू-कश्मीर राज्य के लद्दाख क्षेत्र में चुशुल घाटी में एक पहाड़ी दर्रा है। 1962 के युद्ध में 13 कुमाऊं दस्ते का यह अंतिम मोर्चा था। इसीलिए इसे रेजांग ला युद्ध के नाम से जाना जाता है।


जिसमे मुख्य रूप से ट्विटर पर ट्वीट कर श्रद्धांजलि अर्पित किए 

प्रियल यदुवंशी , रोहित यदुवंशी , एम.के बाबा यदुवंशी , राजेश यादव आर्या , अंजय यदुवंशी , बिरजा यदुवंशी , सन्तोष यादव , प्रीतम यादव , रितेश यदुवंशी  एवम समस्त यादव समाज के लोगों ने ट्वीट कर श्रद्धांजलि अर्पित किया ।।