69 वर्ष की उम्र में प्रतिदिन 25 कि.मी. की सायकिलिंग

69 वर्ष की उम्र में प्रतिदिन 25 कि.मी. की सायकिलिंग
69 वर्ष की उम्र में प्रतिदिन 25 कि.मी. की सायकिलिंग 



छुरा ग्रामीण :-   संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा प्रत्येक वर्ष 3 जून को दुनिया में साईकिल के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए विश्व साइकिल दिवस के रूप में मनाया जाता है । आज पेट्रोलियम इंधन के बढ़ते दामों और पर्यावरण प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए साइकिल जैसे संसाधनों का उपयोग करना नितांत आवश्यक हो गया है । वर्तमान परिवेश में लोग सुविधाभोगी और आरामतलब हो गए हैं। बिना मोटरसाइकिल के घर से निकलना पसंद नहीं करते लेकिन आज भी ऐसे लोग मौजूद है जो दैनिक जीवन में साइकिल चलाना पसंद करते हैं। ऐसे ही एक शख्सियत हैं सेवानिवृत्त व्याख्याता के.आर.सिन्हा। जो 69 वर्ष की उम्र में भी प्रतिदिन 25 किलोमीटर साइकिलिंग करते हैं और अंचल में स्वावलंबन की मिसाल के रूप में जाने जाते हैं। 





युवा वर्ग अपने सिन्हा गुरूजी को कठोर कार्य करते देख हतप्रभ हो जाते हैं क्योंकि जिस कार्य को गुरूजी आसानी से कर लेते हैं वही कार्य उनसे आधी उम्र के युवाओं के लिए भी दुष्कर हो जाता है । सिन्हा जी अपनी इस कार्य क्षमता का रहस्य बताते हुए कहते हैं कि पैदल चलना, सायकिल चलाना एवं तैराकी से शरीर का पूर्ण व्यायाम हो जाता है।  संयमित खानपान, सही समय पर सोने उठने से स्वस्थ दीर्घायु जीवन पाया जा सकता है। सिन्हा कहते हैं कि स्वस्थ शरीर एवं पर्यावरण संरक्षण का एक सहज उपाय साइकलिंग है। साइकिल चलाने से रक्त संचरण सही रहता है, पूरे शरीर का व्यायाम हो जाता है । उन्होंने बताया कि अपने 44 वर्षों के शिक्षकीय जीवन में साईकिल  के अतिरिक्त दूसरे साधनों का प्रयोग नहीं किया । प्रतिदिन सुबह खेत जाना, स्कूल जाना और अन्य कार्यो के लिए सायकिल का ही प्रयोग करते आए हैं । 




आज भी 45 किलोमीटर दूर अपने गृह निवास सायकिल से ही चले जाते हैं। सिन्हा ने बीती बातें याद करते हुए बताया कि उनकी शिक्षक के रूप में पहली पदस्थापना बीहड़ जंगलों से आच्छादित प्राथमिक शाला दीवना में हुई थी तब गायडबरी की दुर्गम पहाड़ियों में एक बड़ा बोरा धान, चांवल सायकिल में रखकर लाते, ले जाते थे । कहीं पर साइकिल खराब हो जाता था या पंचर हो जाए तो इसके लिए कैरियल में सायकिल बनाने के सारे औजार रखा करते थे। जहां कहीं भी खराबी आई तो वहीं पर साइकिल सुधार खुद ही किया करते थे ।सिन्हा जी वर्तमान पीढ़ी से भी प्रतिदिन सायकिलिंग करने का आह्वान करते हैं।