चैतुरगढ़ में जान जोखिम में डालकर भक्त पहुंच रहे हैं माता के दरबार-भय पर भारी भक्ति,

चैतुरगढ़ में जान जोखिम में डालकर भक्त पहुंच रहे हैं माता के दरबार-भय पर भारी भक्ति,

चैतुरगढ़ में जान जोखिम में डालकर भक्त पहुंच रहे हैं माता के दरबार-भय पर भारी भक्ति,


 दीपक शर्मा/कोरबा/पाली:-आस्था और भक्ति ईश्वर प्राप्ति के सरल, सहज मार्ग हैं ,इसे साबित करता है चैतुरगढ़ की वर्तमान भौगोलिक स्थिति और दर्शन के लिए पहुंच रहे भक्तों का जज्बा ।

बरसात ने जिले के धार्मिक पर्यटन स्थल चैतुरगढ़ में कहर बरपाया था, जिसके अवशेष देखे जा सकते हैं। जगह-जगह भारी-भरकम पत्थर भूस्खलन के रूप में गिरे पड़े हैं ।सड़क मार्ग क्षतिग्रस्त हुआ है, पुल पुलियों को भी नुकसान पहुंचा है, जबकि माता के दरबार तक पहुंचने के लिए बनाए गए रैंप बुरी तरह अस्त व्यस्त हो गया है।




हालत यह है कि पहाड़ में जगह-जगह दरारें पड़ी है और रैम्प के किनारे,नीचे खोखले हो चुके हैं जिस पर आवाज ही खतरनाक और जानलेवा हो सकता है इसके पुनर्निर्माण में अभी समय लगेगा खतरे को देखते हुए प्रशासन ने रैंप पर आवागमन प्रतिबंधित कर दिया है, यहां तक कि पैदल तक जाने नहीं दिया जा रहा है। इसके बावजूद श्रद्धालु माता के दरबार में माथा टेकने पहुंच रहे हैं। भक्तों का जज्बा और आस्था देखकर स्थानीय कर्मी भी ज्यादा दबाव पूर्वक मना नहीं कर पा रहे हैं ।क्योंकि भक्त कई किलोमीटर दूर से मां के दर्शन के लिए आए हैं। हालांकि वे सावधानी बरतने की समझाइश देते हैं।लाखो लोगों की आस्था के केंद्र चैतुरगढ़ स्थित आदिशक्ति मां महिषासुर मर्दिनी देवी मंदिर में सड़क रैम्प के क्षतिग्रस्त होने के कारण शारदीय नवरात्रि पर्व नहीं मनाने का निर्णय लिया है। फल स्वरूप मंदिर के कलश भवन में प्रज्ज्वलित होने वाले हजारों ज्योति कलश के दर्शन नहीं हो रहे हैं यद्यपि मंदिर समिति 9 दिन तक माता की पूजा अर्चना और अखंड ज्योत कर सेवा अर्चना में जुटी हुई है।