लोक निर्माण विभाग और प्रशासनिक लापरवाही के कारण युवा खिलाड़ियों में पनप रहा आक्रोश, लगभग 43 लाख के मिनी स्टेडियम कार्य को लगा ग्रहण, 20 गांव के युवाओं ने कहा जिम्मेदार कौन, अब आंदोलन करने को हुए मजबूर, अतिक्रमण की चपेट में जशपुर जिला मुख्यालय ही नहीं बल्कि गांव की जमीन भी जा रही....

लोक निर्माण विभाग और प्रशासनिक लापरवाही के कारण युवा खिलाड़ियों में पनप रहा आक्रोश, लगभग 43 लाख के मिनी स्टेडियम कार्य को लगा ग्रहण, 20 गांव के युवाओं ने कहा जिम्मेदार कौन, अब आंदोलन करने को हुए मजबूर, अतिक्रमण की चपेट में जशपुर जिला मुख्यालय ही नहीं बल्कि गांव की जमीन भी जा रही....

लोक निर्माण विभाग और प्रशासनिक लापरवाही के कारण युवा खिलाड़ियों में पनप रहा आक्रोश, लगभग 43 लाख के मिनी स्टेडियम कार्य को लगा ग्रहण, 20 गांव के युवाओं ने कहा जिम्मेदार कौन, अब आंदोलन करने को हुए मजबूर, अतिक्रमण की चपेट में जशपुर जिला मुख्यालय ही नहीं बल्कि गांव की जमीन भी जा रही....

राकेश गुप्ता/जशपुर/सन्ना :-  जिला मुख्यालय की तर्ज पर ग्रामीण क्षेत्रों में भी राजस्व क्षेत्र के अतिक्रमण मामलों का निपटारा अधर में लटक गया है जिससे शासकीय योजना व शासन के द्वारा स्वीकृत राशि का सदुपयोग नहीं हो पा रहा है। 


जिले के सुदूर अंचल सन्ना क्षेत्र के युवाओं,जनप्रतिनिधियों में आक्रोश देखने को मिल रहा है,जहां सालों से स्वीकृत मिनी स्टेडियम का कार्य अधर में लटका हुआ है। जिसे लेकर युवा खिलाड़ी अब कुछ भी कर गुजरने को तैयार दिख रहे हैं। पूरा मामला आपको बता दें कि भाजपा शासन काल मे साल 2017-18 में जिले के सन्ना में लगभग 43 लाख रुपये की मिनी स्टेडियम की कार्य लोकनिर्माण विभाग से स्वीकृत हुई थी। जिसके बाद कार्य की शुरुवाती प्रक्रिया प्रारंभ तो हुई परन्तु कार्य इतनी धीमी गति से हुई कि अब तक 4 साल बीत जाने के बाद भी कार्य पूरी नही हो सकी। जिसका मुख्य कारण एक तरफ ठेकेदार की लापरवाही बताई जा रही है तो वहीं दूसरे तरफ जमीन विवाद भी बताया जा रहा है। अब आपको बता दें कि सन्ना वन विभाग के द्वारा लगभग आठ वर्ष पहले समतलीकरण कर खेल मैदान की जमीन दी गयी, जिसके बाद खिलाड़ियों उत्साह बढ़ गया।जिसके बाद उसी रकबा खसरा में मिनी स्टेडियम का कार्य स्वीकृत हुआ। जिसके बाद उस शासकीय भूमि के चारों दिशा में भारी मात्रा में जमीन की खरीद फरोख्त के साथ अवैध बेजाकब्जा का कार्य तेज हो गया। अब उस शासकीय भूमि का मात्र एक टुकड़ा ही खिलाड़ियों के लिये बचा हुआ है।कार्य प्रारंभ होता है और पुनः कार्य बंद हो जाता है। वहीं युवा खिलाड़ी और ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधि गण का कहना है कि उनके द्वारा तहसील कार्यालय में तहसीलदार को बेजा कब्जा पर कार्यवाही करने के लिए लिखित शिकायत की गई थी।जिसके बाद राजस्व विभाग के द्वारा शासकीय भूमि में हुए बेजा कब्जा का लगभग  20 प्रतिशत भाग को खाली कराया गया और कुछ दिनो बाद पुनः वहां मौजूद बेजा कब्जाधारी के द्वारा खाली कराये गये भूमि में फिर से कब्जा कर लिया गया।जिसके बाद खिलाड़ियों के द्वारा तहसील की मिलीभगत का आरोप भी लगाया जा रहा है।वहिं स्टेडियम का कार्य भी लटक गया। आपको यह भी बताना जरूरी है कि वहां मौजूद खिलाड़ियों के लिए खेल मैदान की भूमि का 50 प्रतिशत भाग में अवैध कब्जा हुआ पड़ा है और प्रशासन मौन दिख रहा है।जिले का यह सुदूर अंचल सन्ना के खेल मैदान में करीब 20 से 30 गांव के खिलाड़ियों का आस्था और खेल प्रेम जुड़ा है।परन्तु सन्ना में वर्तमान में एक भी खेल मैदान व्यवस्थित नही हुई है।जिसके वजह से यहां के खिलाड़ियों में निखार नही आ रहा है और ना ही यहां के खिलाड़ियों के आगे बढ़ने का मौका मिल रहा है।सवाल यह उठ रहा है कि इसका जिम्मेदार आखिर कौन है?


वहीं जब हमने इस विषय मे कार्यालय लोकनिर्माण विभाग के सन्ना सब इंजीनियर सुनील एक्का से बात किया तो उनका कहना है कि स्टेडियम का कार्य अधूरा लटकने का मुख्य कारण वहां मौजूद जमीन विवाद से जिसके कारण कार्य मे तेजी नही आ पा रही है।