वर्ल्ड यूथ स्किल डेवलपमेंट डे के अवसर पर इंडस पब्लिक स्कूल दीपका ने ऑनलाइन वेबिनार आयोजित कर स्किल डेवलपमेंट विषय पर रखी परिचर्चा

वर्ल्ड यूथ स्किल डेवलपमेंट डे के अवसर पर इंडस पब्लिक स्कूल दीपका ने ऑनलाइन वेबिनार आयोजित कर स्किल डेवलपमेंट विषय पर रखी परिचर्चा

०० आईपीएस द्वारा लगातार स्किल डेवलपमेंट की क्लासेस ऑनलाइन संचालित की जा रही हैं डॉ संजय गुप्ता (आई.पी.एस)

 

०० नॉलेज के साथ साथ स्किल डेवलपमेंट पर भी फोकस करना अत्यंत आवश्यक डॉ संजय गुप्ता (आई.पी.एस)

 

बिलासपुर| ज्ञात हो कि 15 जुलाई को विश्व स्किल दिवस के अवसर के पर प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी इंडस पब्लिक स्कूल दीपका द्वारा ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजित कर स्किल डेवलपमेंट विषय पर विस्तृत परिचर्चा रखी गई जिसमें विद्यार्थियों ने स्किल डेवलपमेंट से सम्बंधित अपने ज्ञान स्तर को बढ़ाया व नॉलेज तथा स्किल में अंतर को जाने लोगों ने जाना की जो चीज हम पढ़ते हैं सुनते हैं देखते हैं वह नॉलेज के रूप में हमारे अवचेतन मन में रिकॉर्ड होता है फिर जब कभी जीवन में आवस्यकता पढ़ती है हमारा कॉन्शियस माइंड हमारे सब कॉन्शियस माइंड को निर्देशित करता है कि पूर्व के अनुभव के आधार सम्बन्धित फोल्डर हमें रिलेटेड ज्ञान को दिखाए यह हुई नॉलेज अब अगर बात करें स्किल की आंतरिक गुण की तो जिस ज्ञान को हक़ प्रैक्टिस में लाकर बारंबार उसका अभ्यास करते हैं वह हमारे अवचेतन मन में रिकॉर्ड हो जाता है तथा ऑटोमैटिक अवस्था में चला जाता है, जिस कार्य को हम बिल्कुल सहजता से बिना किसी मिस्टेक के करने लग जाते हैं जैसे तैरना साईकल चलाना चलना दौड़ना इत्यादि यह सारे कार्य हमने बारम्बार प्रैक्टिस की जिससे यह हमारे अवचेतन मन में ऑटोमैटिक पद्धति के रूप में रिकॉर्ड हो जाता है फिर जबकभी हमें आवस्यकता होती है हमारा अवचेतन मन स्वचलित पद्धति के रूप में उभरकर सम्बन्धित कार्य को कर दिखलाता है, तो देखा जाए तो हर कार्य दो मर्तबा होता है एक संकल्पों के रूप में मन मे दूसरा आउटर वर्ल्ड में वही कार्य प्रत्यक्ष रुप से होता है हम जिस भी फील्ड में रहें हमें निरंतर अपने आप को ज्ञान व स्किल को डेवेलोप करते रहना चाहिए, नवीनता लाती रहनी चाहिए, चूंकि हम नवीनता नहीं लाएंगे तो पिछड़े रह जाएंगे, आज लोग एक कला एक स्किल अपने में डेवेलोप कर लेते हैं फिर उस पर ही ताउम्र आश्रित रहते हैं, जिससे स्किल में डेवलपमेंट ना होने से एक समय ऐसा आता है जब हम अपने आप पर ही बोझ की तरह बन जाते हैं व परिवार वालों के ऊपर भी बोझ की तरह बन जाते हैं, उदाहरण के तौर पर मान लीजिये किसीने कंप्यूटर फील्ड को अपना कैरियर के तौर पर चुना फिर एक कोर्स करके उससे संबंधित जॉब की तलाश करते रहते हैं कई मर्तबा वर्षों बित जाते हैं, पर एक ही स्किल की बदौलत वह जीवन में कुछ अलग पाने की अलग कर दिखलाने की कोसिस में लगे रहते हैंअगर हमारी बुद्धि क्लियर है तो जीवन मे हर कुछ परफेक्ट रहेगा उसके लिए अपनी बुद्धि की एकाग्रता को बढ़ाएं और बुद्धि की खुराक को ज्ञान अर्जन द्वारा बढ़ावेंएकाग्रता का अर्थ है जब मन व बुद्धि एक साथ एक दिशा में काम करें, उसके लिए चाहिए अभ्यास, अनुभव ही सबसे बड़ी ताकत है चूंकि अनुभव के आधार पर ही विचारों की उत्तपत्ति होती है फिर विचार वाणी तथा कर्म बनते हैं जैसा कि कहावत भी है कि दूध का जला बालक दही को भी फुंक फूंक कर पिता है, ठीक उसी प्रकार अन्य के संस्कारों की वजह से गढ्ढे में गिरकर अपने भविष्य को चौपट करने वाला बालक भी बुरे संस्कारों से ग्रस्त लोगों से परहेज करने लग जाता है|

अक्सर लोग एक स्किल की बदौलत ताउम्र जीवन यापन करने हेतु आश्रित रहते हैं व विपरीत परिस्थिति आने पर कई मर्तबा स्किल की कमी होने पर परिस्थिति के अनुसार ढल नहीं पाते, व अपने साथ साथ परिवारवालों पर भी भारी पड़ते हैं उदाहरण के तौर पर मौजूदा बने देश के हालातों में जबकि सम्पूर्ण देश में लॉक डाउन की स्थिति बनी हुई है, लोगों के व्यापार बन्द है तो वह लोग जो अब तक एक ही स्किल की बदौलत जीवन यापन करते आये उनके लिए यह समय विकराल समस्या के रूप में परीक्षा की घड़ी है तो वहीं ऐसे लोग जिनमे एक से अधिक स्किल डेवेलोप हैं वह परिस्थिति के अनुसार अपने आप को मोल्ड करके सहज रीति से जीवन यापन कर रहे हैं, स्किल, हुनर होने के बाद भी उसे सीमित रखना अपने काबिलियत अपने टैलेंट को रोककर रखना है क्योंकि एक हम ही हैं जो अपने गुणों को काबिलियत को टैलेंट को स्किल को जानते हुए उसे और भी विस्तार प्रदान कर सकते हैं, बाकी तो सब केवल हमें राय दे सकते हैं कि हममें अमुख स्किल है उस अनुसार हमें उस फील्ड में अपने आप को डेवलप करना चाहिए जिसके लिए हमें अपने स्किल को और भी बढ़ाने की आवश्यकता होती है तो इस तरह से देखा जाए तो हम ही अपनी सफलता के जिम्मेदार होते हैं और हम भी अपनी असफलता के जिम्मेदार भी होते हैं  ज्ञान की कमी की वजह से स्किल की कमी की वजह से लोग अपने लक्ष्य को पाने में नाकामयाब होते हैं और वही संबंधित ज्ञान व स्किल होने से हम तयसुदा लक्ष्य को आसानी से प्राप्त कर लेते हैं, लोगों का मानना होता है कि ज्ञान व स्किल एक ही होता अक्सर इस विषय पर लोग कंफ्यूज हो जाते लोगों को यह समझना होगा कि ज्ञान व स्किल में अंतर है, जब तक इस अंतर को नहीं समझेंगे स्किल डेवेलोप करने में खुद ही बाधक बनते रहेंगे, हमें अपने स्किल डेवेलोप करने में हिचकिचाना नहीं चाहिए कोई कार्य छोटा या बड़ा नहीं होते यह हम पर निर्भर करता है कि किसी कार्य को अपने काबिलियत अपनी स्किल से किस मुकाम तक पहुंचा सकते हैं, दुनियां में जितने कार्य बने हैं करने के लिये ही बने हैं, हमें सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हुवे निरंतर स्किल डेवलपमेंट पर फोकस करते रहना चाहिए, प्रत्येक व्यक्ति अपने आप में अलग अलग गुण व काबिलयत रखता या सबमें अलग अलग पोटेंशलिटीस है अपने आंतरिक गुणों के आधार पर स्किल टैलेंट के आधार कोई बहु मनचाहा मुकाम हांसिल कर सकता है एक व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाने में स्किल का महत्वपूर्ण योगदान होता है, स्किल हमें अंदर से अपने काबिलियत को सहीं दिशा में ड्राइव करने की कैपेबिलिटी प्रदान करता है| आगे डॉक्टर संजय गुप्ता ने बतलाया कि इंडस पब्लिक स्कूल वैसे तो स्किल डेवलपमेंट पर विशेष फोकस करता ही है पर इस लॉक डाउन के दौरान जबकि सभी स्टूडेंट्स अपने घरों में है तब उनके पास पर्याप्त व सही समय है कि एकांत का इस्तेमाल अपने स्किल को देवेलोप करने में लगावें जिसको लेकर हम आई पी एस ऑनलाइन स्किल डेवलपमेंट, पर्सनालिटी डेवलपमेंट क्लासेस भी लगातार प्रदान कर रहे हैं जिससे कि समय का सदुपयोग हो व विद्यार्थियों के स्किल भी निखरते रहें|