रोते बिलकते नम आंखों से दुर्गा माता को दी विदाई हरदीवासी

रोते बिलकते नम आंखों से दुर्गा माता को दी विदाई हरदीवासी

रोते बिलकते नम आंखों से दुर्गा माता को दी विदाई हरदीवासी


छुरा ग्रामीण-ग्राम पंचायत हरदी में माँ दुर्गा की सेवा से भाव विभोर हो कर पूजा अर्चना के साथ सुख समृद्धि की कामना करते हुए शेरावाली माँ के नव रूपो के साथ नाव दिन तक मंत्रमुग्ध होकर झूम उठे।

इस वर्ष माता के स्थान को फूलों की माला व पंडालों से सजाया गया है जो आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। दुर्गा विसर्जन के दिन भक्त माता के मस्तक पर सिंदूर लगाकर उनकी पूजा कर मां दुर्गा की आरती उतारते हैं।इसके पश्चात मां दुर्गा की प्रतिमा की सज्जा कर एक विशाल जुलूस के साथ विसर्जन के लिए नदी,तालाब तक ले जाया जाता है।




इस जुलूस में अधिक से अधिक संख्या में श्रद्धालु परंपरागत गीतों पर नृत्य किया।भक्त ढोल की धुन पर धुनुची नृत्य करते हैं। हाथ में धूप कपूर तथा नारियल की भूसी से भरे मिट्टी के पात्र में धुंआ किया जाता है।तथा धागे की ताल पर नर एवं नारी पारंपरिक नृत्य में सहभागी होते हैं।नवरात्रि में माँ दुर्गा की पूजा आराधना की जाती हैं।देवी दुर्गा की उत्त्पत्ति दुर्गम नामक राक्षस को मारने के लिए हुई थी।दुर्गम ने ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त करने के बाद चारों वेदों को लुप्त कर दिया था जिसका अंत देवी दुर्गा ने किया था दानवों का नाश करने वाले दुर्गा मां सबसे शक्तिशाली देवी के रूप में जानी जाती है। दुर्गा मां के नौ रूपों की कहानी हमें बुराई पर अच्छाई की जीत का महत्व समझती है।दुर्गा मां को लोग शेरावाली मां के नाम से भी जानते हैं अपने हर रूप में दानवो का विनाश करने वाली दुर्गा मां की महिमा अपरंपार है। दुर्गा मां के अंतिम रूप अर्थात नवरूप की सिद्धिदात्री के नाम से जाना जाता है सिद्धिदात्री की अनुकंपा से ही शिव जी को अर्धनारीश्वर का रूप मिला अपने इस रूप में वहां भक्तों के सभी मनोकामना को पूर्ण करती है सिद्धिदात्री का वाहन सिंह है और उनका आसन कमल का फूल है।नवरात्रि और विजय दशमी तिथि को माँ दुर्गा विसर्जन किया जाता हैं। देवी दुर्गा के ज्यादातर भक्त विसर्जन के बाद ही नवरात्रि का व्रत तोड़ते हैं दुर्गा विसर्जन के बाद विजयदशमी का त्यौहार मनाया जाता है इसी दिन भगवान श्रीराम ने राक्षस राज रावण को मारा था वही देवी दुर्गा ने इस दिन असुर महिषासुर का वध किया था।भजन जस गीत गायक श्यामसुंदर यादव,थानुराम तारक, लखन तिवारी, डॉ संतोष तारक, तिलक तारक, श्री राम, बलदेव ध्रुव, गजरु राम साहू, प्रीत राम, रोहित, महिला मंडली धरमिन बाई तारक,अंशु,जानकी,शीतल,लक्ष्नी,सोहद्र, कुसुम,लाक्षो,अम्बी, हिरू,युवा सहयोगी उमेश कुमार तारक, युगल, कुणाल, इंद्रमन,मिथलेश,नवीन, देव, अरविंद,ऋषभ,विजय तिवारी, अमर तारक,रमेश,जीवन,राज,सम्पूर्ण कार्यक्रम के मुख्य आयोजनकर्ता राजा तिवारी,राहुल तारक, सौरभ तारक,सागर तारक एवं समस्त ग्रामवासी व श्रद्धालुगण  उपस्थिति थे।