बजार से महंगे बारदाना खरीदने के लिए मजबूर हो रहे हैं किसान

बजार से महंगे बारदाना खरीदने के लिए मजबूर हो रहे हैं किसान

बजार से महंगे बारदाना खरीदने के लिए मजबूर हो रहे हैं किसान


रोहित यादव/बलरामपुर :- जिले में एक दिसंबर से धान खरीदी प्रारंभ हो गई है धान खरीदी के मद्दे नजर किसानो की सबसे बड़ी चिंता बरदाने  को लेकर  है  निर्देश में राज्य शासन द्वारा  का कहा गया है की खरीदी के शुरू दिन से ही किसान के बारदाने में धान खरीदी जायेगी । शासन के उक्त निर्देश के बाद एकाएक बाजार में बारदाना के दाम बढ़ गए हैं । मजे की बात तो यह है की व्यापारियों  के फटे पुराने बारदाना भी अब कीमती हो गए हैं । एक बारदाना की कीमत बाजार में  35_40 रूपए तक जा पहुंचा है व्यापारियों की मानें तो धान खरीदी शुरू होते ही दाम और भी बढ़ सकती है हालात यहां तक पहुंच चुका  है  की अब फटे पुराना वारदाना भी बाजार में बिकने लगा है और किसानों की मजबूरी है की उन्हें धान बेचनी है तो बारदाना खरीदना होगा ।


*फटे पुराने बरदाना खरीदने को मजबूर हो रहे हैं किसान*


एक ओर राज्य शासन  के द्वारा किसानों के बरदानो पर धान खरीदी की जाने की बात कही है किंतु किसानों के बरदानों के बदले 15 रूपए का ही भुक्तान किया जाता है जबकि किसानो को वही वारदाना 30 से 35 रूपए तक खरीदना पड़ रहा है निश्चित रूप से किसानों के लिए नुकसान का सौदा ही कहा जा सकता है पर किसानो को मजबूरी है वारदाना खरीदना । महीनों से धान की रखवाली कर रहे किसानो को अपनी उपज बेचने की पीड़ा के चलते वह नुकसान भी बर्दास्त कर रहे हैं और बारदाना खरीदने के लिए मजबूर हो रहे हैं ।



किसानो को होगा प्रति क्विंटल 100 रूपए अतिरिक्त खर्च


किसानों का कहना है की हमें प्रति क्विंटल 100 रूपए का अतिरिक्त खर्च वारदानो पर करना होगा । धान का समर्थन मूल्य 1940 रुपए मिलना है अब वह बारदाने के खर्च के बाद 1840 रूपए ही मिलेगा , क्योंकि 100 रूपए का खर्च बारदाने का बढ़ गया है । 100 के खर्च को इस तरह समझा जा सकता है जैसे एक बारदाना   35 रूपए का तो एक क्विंटल धान के लिए 3 बारदाने की आवश्यकता होगी और 3 बारदाने का खर्च लगभग 100 रूपए आएगा । इसका भार तो किसानों के उपर ही आएगा , किसानों के धान को किसानो के सुविधा के लिए प्लास्टिक के बोरियो में भी लेनी चाहिए । क्योंकि की किसानों के पास प्लास्टिक बोरियां में खाद आने के कारण  उपलब्ध रहती है।