खुशियों का त्योहार दिवाली कोरोना काल में ला रहा लोगों के चेहरे पे मुस्कान

खुशियों का त्योहार दिवाली कोरोना काल में ला रहा लोगों के चेहरे पे मुस्कान

खुशियों का त्योहार दिवाली कोरोना काल में ला रहा लोगों के चेहरे पे मुस्कान 

 

गरियाबंद- खुशियों का त्योहार दिवाली का नाम सुनते ही लोगों के चेहरों पर एक अलग सी खुशी झलक ने लगती है बच्चे हो बूढ़े हो या हो जवान दिवाली त्योहार के नाम से ही सब खुशी से झूम उठते हैं रोशनी का त्योहार दिवाली बुराई पर अच्छाई की जीत के लिए मनाया जाता है। यह पर्व धन की देवी लक्ष्मी और राम और सीता की कथा के सम्मान में मनाया जाता है


दिवाली पर्व पर लोग अपने अपने घरों में रंगोली बनाकर अपने आंगन की शोभा बढ़ाते हैं प्राचीन समय से ही रंगोली बनाना काफी प्रचलन में पाया गया है। आज भी भारत के कुछ ग्रामीण इलाकों में घर की दीवारों को रंगोली की आकृतियों से सजाया जाता है। लेकिन आधुनिक भारत में खासतौर पर रंगोली का इस्तेमाल त्यौहारों तक ही सीमित रह गया है। ज्यादातर रंगोली को दिवाली के उत्सव पर बनाया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हम हर दिवाली पर अपने घरों में रंगोली क्यों बनाते हैं।


रंगोली से आती है सुख और शांति


वैसे अगर मान्यताओं की मानें तो रंगोली बनाने से घर में सुख,शांति और समुद्धी का वास होगा। इसके साथ ही घर में सौभाग्य का आगमन होगा। घर से सारी बुरी एनर्जी चली जाएगी और दोष दूर होंगे, जीवन नए रंग और खुशीयों से भर जाएगा।



राम जी के आगमन पर बनी थी रंगोली लोक मान्यताओं के आधार पर ऐसा माना जाता है कि, लंकेश रावण का वध करने के पश्चात जब श्रीराम अपनी पत्नी सीता के साथ 14 वर्षों का वनवास व्यतीत करके अयोध्या वापस लौट रहे थे, तब अयोध्या वासियों ने उनका पूरे हर्षोल्लास से स्वागत किया था। इसके लिए अयोध्या वासियों द्वारा घर की साफ-सफाई करके घर के आंगन में या फिर प्रवेशद्वार के समीप रंगोली बनाई गई थी तथा पूरे अयोध्या को दीपक से सजाया गया था। तभी से प्रत्येक वर्ष दीपावली पर रंगोली बनाने का रिवाज़ प्रचलित हो गया।


दीपावली भारत में मनाया जाने वाला सबसे बड़ा हिंदू त्यौहार है। दीपावली का मतलब- दीप जिसका मतलब है रोशनी और वली जिसका मतलब है पंक्ति, अर्थात रोशनी की एक पंक्ति। दीपावली का त्यौहार चार दिनों के समारोहों से चिह्नित होता है जो अपनी प्रतिभा के साथ हमारी धरती को रोशन करता है और हर किसी को अपनी खुशी के साथ प्रभावित करता है। इस दौरान भगवान श्री गणेश और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। पुराणों के अनुसार, दीपावली के दिन ही भगवान राम अयोध्या लौटे थे। भगवान राम के आने की खुशी में अयोध्यावासियों ने उनका दीप जलाकर स्वागत किया था। सुख-समृद्धि की कामना के लिए दिवाली से बढ़कर कोई त्यौहार नहीं होता इसलिये इस अवसर पर लक्ष्मी की पूजा भी की जाती है। दीपदान, धनतेरस, गोवर्धन पूजा, भैया दूज आदि त्यौहार दिवाली के साथ-साथ ही मनाए जाते हैं।