चैतमा वन परिक्षेत्राधिकारी ने जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा कर सीड बॉल छिड़काव कार्यक्रम किया आयोजित, की गई कड़ी निंदा

चैतमा वन परिक्षेत्राधिकारी ने जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा कर सीड बॉल छिड़काव कार्यक्रम किया आयोजित, की गई कड़ी निंदा

चैतमा वन परिक्षेत्राधिकारी ने जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा कर सीड बॉल छिड़काव कार्यक्रम किया आयोजित, की गई कड़ी निंदा


दीपक शर्मा/पाली/चैतमा:-वैसे तो कटघोरा वनमंडल में हो रही कारगुजारी किसी के नजरों से छिपा नही रह गया है किंतु अबविभाग द्वारा आयोजित कार्यों में भी जनप्रतिनिधियों की घोर उपेक्षा शीर्ष नेताओं की नजरों में निंदनीय विषय बनकर खटकने लगा है। ऐसे ही बीते 11 जुलाई को वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा कटघोरा वनमंडल के माध्यम से सभी वनपरिक्षेत्रों सहित चैतमा परिक्षेत्र में भी फलदार पौधों के बीज और सीड बॉल की बुवाई का कार्यक्रम आयोजित किया गया। किंतु इस कार्यक्रम में वनपरिक्षेत्राधिकारी द्वारा जनप्रतिनिधियों की घोर उपेक्षा करते हुए आसपास ग्रामीणों की भीड़ जुटाकर सीड बॉल छिड़काव का आयोजन कर अपने कर्तव्यों की इश्रिती कर ली गई। जिसकी निंदा की गई है। 


उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री के मंशानुरूप छत्तीसगढ़ के समस्त परिक्षेत्रों में सीड बॉल एवं साग सब्जी की बीजों की बुवाई कार्यक्रम का आयोजन 11 जुलाई को तय किया गया था और महाअभियान के इस कार्यक्रम में प्रमुख रूप से अतिथि बतौर स्थानीय एवं आसपास जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित कर उनकी उपस्थिति में तय आयोजित कार्य करने जैसा थीम भी रखा गया था किन्तु चैतमा वन परिक्षेत्र के परिक्षेत्राधिकारी मृत्युंजय शर्मा द्वारा उक्त निर्धारित आयोजन में स्थानीय जनप्रतिनिधियों को बुलाना जरा भी मुनासिब नहीं समझा और खुद सुर्खिया बटोरने की चाह में आसपास ग्रामीणों की भीड़ इकट्ठी कर बीज बुआई एवं छिड़काव के कार्यक्रम सम्पन्न कर दिया गया। परिक्षेत्राधिकारी के इस कृत्य की खबर जैसे ही क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के कानों तक पहुँची वे काफी रुष्ट नजर आए। चैतमा परिक्षेत्र में आयोजित सीड बाल कार्यक्रम में उपेक्षित मामले को लेकर जब चैतमा निवासी एवं जनपद पंचायत पाली के उपाध्यक्ष नवीन सिंह का तर्क जानना चाहा तो उन्होंने उक्त कार्यक्रम के किसी भी प्रकार की जानकारी नहीं होने की बात कही तथा रेंज अधिकारी मृत्युंजय शर्मा पर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की घोर उपेक्षा का आरोप लगाया। वही जनपद सदस्य एवं वन विभाग की सभापति श्यामा पांडे ने भी आमंत्रण प्राप्त नही होने की जानकारी देते हुए कहा कि जब विभाग के सभापति को जानकारी नही दी गई तो इसका मतलब यह हुआ कि विभाग मनमाना रवैया अपनाते हुए काम कर रही है।सभापति श्रीमती पाण्डेय ने आगे कहा कि जनप्रतिनिधियों को जनता चुनकर अपना प्रतिनिधि बनाती है किन्तु जहाँ जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा हो रही हो वहाँ की आम जनता के बीच ऐसे अधिकारी क्या सामंजस्य बैठा के काम कर पाएंगे यह सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।अन्य जनप्ररिनिधियों ने भी इस उपेक्षित कार्य को लेकर विभाग की कड़ी आलोचना करते हुए निंदनीय बताया है। 

      


इस संबंध पर चैतमा वन परिक्षेत्र अधिकारी मृत्युंजय शर्मा से उनका पक्ष जानने पर उन्होंने खुद का बचाव करते हुए अपने अधीनस्थ डिप्टी रेंजर को आमंत्रण की जिम्मेदारी सौपने की बात कही साथ ही स्थानीय पंच एवं सरपंचों की उपस्थिति में कार्यक्रम होना बताया।