प्रदेश में जब कोचिंग को खोलने की दी जा रही है अनुमति, तो स्कूलों को क्यों रखा जा रहा है बंद- अनिल दरयानी

प्रदेश में जब कोचिंग को खोलने की दी जा रही है अनुमति, तो स्कूलों को क्यों रखा जा रहा है बंद- अनिल दरयानी

प्रदेश में जब कोचिंग को खोलने की दी जा रही है अनुमति, तो स्कूलों को क्यों रखा जा रहा है बंद- अनिल दरयानी


शक्ति के अशासकीय विद्यालय प्रबंधक संघ ने विद्यालय खोलने को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम शक्ति को सौंपा ज्ञापन



कन्हैया गोयल/शक्ति जांजगीर-अशासकीय विद्यालय प्रबंधक संघ सक्ती के द्वारा 12 जुलाई को पांच सूत्रीय मांगों को लेकर राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नाम अनुविभागीय दंडाधिकारी सक्ती को ज्ञापन दिया गया। इस संबंध में संघ की ओर से जानकारी देते हुए अनिल दरयानी ने बताया कि कोविड संक्रमण के दरम्यान शालाओं में आफ लाईन अध्यापन नहीं होने से कोर्ट के आदेश के बावजूद अधिकांश पालकों के द्वारा ट्युशन फीस अदा नहींं की गई है,इस पर शासन के द्वारा आर टी ई के देय राशि का भुगतान नहीं किया जाना समझ से परे है,इसके अलावा अशासकीय शालाओं के विद्यार्थियों को बिना स्थानांतरण प्रमाण पत्र के अन्य विद्यालय में प्रवेश देना भी सर्वथा अनुचित व अमानवीय है,साथ ही सभी कार्यालयों, संस्थाओं के साथ कोचिंग संस्थानों को खोलने के बावजुद विद्यालयों को बंद रखना अब भारी पड़ रहा है।



फलस्वरूप आज विद्यालय में आफलाइन अध्यापन की अनुमति, आर टीई की देय राशि का भुगतान, बिना स्थानांतरण प्रमाण पत्र अन्य विद्यालय में प्रवेश पर रोक, कोविड काल में स्कूली वाहनों के कर व प्रीमियम में छुट प्रदान करने के साथ अशासकीय विद्यालयों में भी पाठ्यपुस्तक का वितरण शिक्षा जिला मुख्यालय से किए जाने हेतु शिक्षा मंत्री के नाम पर जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन दिया गया।इस अवसर पर अशासकीय विद्यालय के प्रबंधक संघ की ओर से चितरंजय सिंह पटेल अधिवक्ता (व्यवस्थापक  शिशु मंदिर) के साथ प्रतिनिधि मंडल में योगेश कुमार साहू (अनुनय कान्वेंट), मो.अनीश खान एवं टी पी उपाध्याय (लिटिल फ्लावर), तिवारी जी (शिशु भारती) , तेजप्रकाश जायसवाल (प्रखर स्कूल), अनिल दरयानी (जेबीडीएवी) शामिल रहे। तथा अशासकीय विद्यालय प्रबंधक संघ ने कहा है कि उनके द्वारा 12 जुलाई को प्रेषित ज्ञापन में दर्शित समस्याओं का शीध्र निराकरण नहीं होने पर जिला दंडाधिकारी जांजगीर चांपा से से भी मिलकर ज्ञापन देगा।