विशेष पिछडी जनजाति के लोगों का कुछ नही बिगाड़ सका कोरोना महामारी

विशेष पिछडी जनजाति के लोगों का कुछ नही बिगाड़ सका कोरोना महामारी

विशेष पिछडी जनजाति के लोगों का कुछ नही बिगाड़ सका कोरोना महामारी 


विशेष प्रतिनिधि नरेंद्र तिवारी



गरियाबंद/छुरा :- आदिवासी विकास खंण्ड छुरा वनांचल क्षेत्र मे शासन से विशेष पिछडी जनजाति का दर्जा प्राप्त वनवासी कमार , भूजिया जाति के लोगो मे जागरूकता की कमी के साथ शिक्षा का अभाव एंव अंधविश्वास मे अपने हाल पर जीवन जीने की परम्पराओं रहन सहन खान पान के साथ जंगलो मे निवास कर शहरी चकाचौंध से दूर रहने वाले शिकारी जाति हमेशा महमारी ,ऐपीडेमिक , मलेरिया जैसे बीमारियों के शिकार होते है । आज पूरा विश्व समुदाय इस महान कोरोना महामारी से पीडित है ओर लाखो लोग काल के गाल मे समा गये ऐसे विकट परिस्थितियों के बीच छुरा वनांचल के वनवासियों जो विभिन्न  पारा ,टोला जंगलो मे जंगली जानवरो के बीच सालो साल से निवासरत है लेकिन इस भयावह महामारी के बीच ये विशेष पिछडी जनजाति के लोंगो के लिए न मास्क जरूरी न दो गज की दूरी जरूरी इस कोरोना काल मे है फिर भी ये वनवासियों की कोविड (19) कुछ बिगाड़ नही सका ।यह जनजाति की जनसंख्या दिनोदिन घटती जा रही हैं ।पुरुषों की संख्या महिलाओं की अपेक्षा कम है । संस्थागत प्रसव कराने के प्रति जागरूकता बहुत ही कम है । मलेरिया बुखार टाईफाइड जैसे बीमारियों के इलाज के लिए अस्पताल डाक्टर के पास जाने के पहले झाडफूंक देवीदेवताओं के पूजा पर विश्वास करते है अंतिम समय पर अस्पताल जाते है ।

यह समाज अपने समाजिक एंव सास्कृतिक नियमों के प्रति कट्टर है । आखेट एवं वनोउपज पर निर्भर रहने वाले यह तिरधनुष धारी कमार ,भूजिया लोगो मे  थोडा बहुत जागरूकता आया है दस बीस बरस मे तो इसका श्रेय महिला बाल विकास विभागआंगनबाड़ी एंव मितानिनों को जाता हैं ।

छुरा आदिवासी विकास खंण्ड के लगभग पच्चीस ग्राम पंचायतों मे विभिन्न पारा ,टोला ,मोहल्ला मे बसे लगभग तीन हजार की जनसंख्या वाले विशेष पिछडी जनजाति कमार एंव भूजिया जनजाति के लोगों मे मात्र दो लोगों मे ही कोरोना के धनात्मक पाया गया दोनों लोग घर पर रहकर स्वस्थ हुये । सरकार ओर समाज के लिए अच्छी बात यह है कि एक भी कमार भूजिया जाति के लोग इस महामारी के कारण जान नही गवाये । इस जाति के लोग बार बार न साबुन , हेंडवास से हाथ सफाई करते है न सैनेटाइजर का उपयोग करते है इनका अपना सैनेटाइजर कच्ची महुआ का शराब है जो शासन पांच लीटर तक रखने का छुट दिया हुआ है । 





कभी इन्जेक्शन से दूर भागने वाले कमार भूजिया जाति के अधिकतर लोग वैक्सीन लगवाया है जिसके पीछे सरपंचों , सचिवों द्वारा राशनकार्ड निरस्त होने पीएम आवास एंव वृद्धा पेंशन जैसे शासकीय योजनाओं का लाभ नही मिलने का भय दिखाकर वैक्सीन लगवाया गया है ।


कोविड वैक्सीन इस जाति के लोगों को शत प्रतिशत लग चुका है ।


बीएम ओ डाक्टर एसके प्रजापति :---- छुरा विकास खंण्ड मे एक भी कमार भूजिया जन जाति के लोगों का कोविड कोरोना से मौत नही हुआ है । लेकिन कुछ पाजेटिव हुआ है ।