प्रशासिका दादी जानकी जी का आज प्रथम पुण्यतिथि के अवसर पर संयुक्त कार्यक्रम का आयोजन

प्रशासिका दादी जानकी जी का आज प्रथम पुण्यतिथि के अवसर पर संयुक्त कार्यक्रम का आयोजन

मुडा़गाँव (कोरासी)- प्रजापिता ब्रम्हाकुमारीज़़-ओम शांति सेन्टर रानीपरतेवा में   25 मार्च दिन गुरुवार को अन्तराष्ट़ीय मुख्यालय माउंट आबू राजस्थान के  मुख्य प्रशासिका(चतुर्थ प्रशासिका) ब्रम्हाकुमारीज़़ दादी हृदय मोहिनी(गुलजार दादी) जी का महाशिवरात्रि को सुबह  8:30 बजे परमात्मा के गोद में  समा जाने के कारण उनके अलौकिक श्रद्धांजलि व पूर्व  तृतीय प्रशासिका दादी जानकी जी का आज प्रथम पुण्यतिथि के अवसर पर संयुक्त कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।जहाँ ब्रह्मा भोजन का भी आयोजन किया गया था। 

 कार्यक्रम में तन, मन, और धन से जुड़े संस्था के आत्मिक भाई बहनों की उपस्थिति में   दोनों दादियों के छाया चित्र मे श्रद्धासुमन पुष्पांजलि अर्पितकर, दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। 

  सेन्टर इन्चार्ज बी के सुमन बहन जी ने पूर्व प्रशासिका दादी जानकी, व दादी गुलजार  के जीवनी बतायी। वही भ्राता नीलकंठ सिंह ठाकुर ने  संस्था से जुड़े अपने

पूर्व के अनुभव को बताते हुवे कहा कि दादी जानकी  व दादी गुलजार जी के श्रीमुख से ज्ञान सुना है। परमात्मा शिव के रथ दादी गुलजार के श्री मुख से शिव महावाक्य सात बार सुनने की अवसर प्राप्त हुआ कहते हुए आज समाज , अंधविश्वास, रूढ़ीवादी, किंवदंती पर विश्वास कर धोखे में  है  कहा।  उन्होने कहा सच्ची गीता का ज्ञान का दाता शिव है न की श्री कृष्ण। कृष्ण भी शिव (बडा़)  से ज्ञान सुनकर, कृष्ण ने भी श्री नारायण देवता बना है। लोग अपने घरों में  लक्ष्मी नारायण  की कथा कराते है। पर लक्ष्मी, नारायण के, जन्म के बारे में नही बताते ऐसे अनेक गुह्य ज्ञान को समझने के लिए सात दिवसीय नि:शुल्क प्रशिक्षण कर प्राप्त कर सकते हैं। धर्म,दर्शन व विज्ञान शास्त्र सम्मत अंतिम ज्ञान का दर्शन कराया जायेगा।

समाजिक कार्यकताओ में मोहन ठाकुर ने कहा कि आदिवासी समाज  की रीति नीति से यह ज्ञान मेल खाती है। हम लोग बडा़ देव को मानते है। यह संस्था भी वैदिक को न मानते हुवे शिव को विज्ञान, धर्म, और दर्शन शास्त्र के सिद्धांत पर मानते  है। आदिकाल में  आदिवासियों का राज था यह यहाँ आ कर जाना। आप सब लोग भी जानने का प्रयास करे कहा। शिक्षक पुरन निषाद ने अन्तराष्ट़ीय मुख्यालय माउंट आबू राजस्थान का अनुभव सुनाया। 

 इस मौके पर  बी के प्रभा बहन, सहयोगी बहन के अलावा, भ्राता भागवत भाई, ओम प्रकाश भाई,पुष्पा माता, डी स्वतंत्रता, के. संस्कृति, के. संस्कार ठाकुर के अलावा  क्षेत्र के बडी़ संख्या मे आध्यात्मिक  विचार धारा  केजुडे