06 माह से जारी नही हो सका ग्राम पंचायतों में कराए गए विकास कार्यों का राशि,दीवाली में निकला सरपंच सचिवों का दिवाला

06 माह से जारी नही हो सका ग्राम पंचायतों में कराए गए विकास कार्यों का राशि,दीवाली में निकला सरपंच सचिवों का दिवाला

06 माह से जारी नही हो सका ग्राम पंचायतों में कराए गए विकास कार्यों का राशि,दीवाली में निकला सरपंच सचिवों का दिवाला




कोरबा/पाली:-डीएमएफ मद से स्वीकृत कार्यों में भर्राशाही बरतने की शिकायत मिलने पर जिला प्रशासन द्वारा कड़ा रुख अपनाते हुए ग्राम पंचायतों में निर्माण कराए गए विकास कार्यों के भुगतान पर विगत 06 माह से रोक लगा दी गई है। जिसके कारण गुणवत्तापरख कार्य कराने वाली एजेंसी ग्राम पंचायतों के सरपंच- सचिव तकादे से परेशान हो रहे है, तो वहीं ग्रामीण मजदूरों को उनका मजदूरी भुगतान नही होने पर उनकी भी दशा खराब हो चली है।


ज्ञात हो कि तत्कालीन कलेक्टर श्रीमती किरण कौशल के कार्यकाल में पाली जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायतों को जिला खनिज न्यास संस्थान मद से कई विकासकार्यों की स्वीकृति मिली थी। जहाँ सीसी रोड, नाली, पुल- पुलिया, रिटर्निंग वॉल, भवन निर्माण जैसे कार्य कराए गए। नवपदस्थ कलेक्टर श्रीमती रानू साहू के पदभार सम्हालने के बाद डीएमएफ के विकासकार्यों में गुणवत्ताहीनता की शिकायत मिली, और उन्होंने उक्त निर्माण कार्यों के भुगतान पर रोक लगाने का निर्देश दिया था। जो आज लगभग 06 माह से निर्माण कार्यों के राशि भुगतान पर रोक लगी हुई है। जिसके कारण निर्माण कार्य पूर्ण करा लिए अनेक सरपंच- सचिव द्वारा निर्माण के दौरान उधार में खरीदे गए मटेरियल सामाग्री का भुगतान नही कर पाने से दुकानदारों के कर्ज से दबे रहकर तकादे से परेशान हो रहे है। वही उन निर्माण कार्यों में नियोजित ग्रामीण मजदूरों को भी उनके मजदूरी का भुगतान नही होने से वे चक्कर काटने को मजबूर है। तथा उनकी भी दशा खराब हो चली है। जिसके कारण ग्रामीण क्षेत्रों में धूमधाम से मनाए जाने वाले अनेक गुजरे पारंपरिक तीज- त्योहार भी उनके लिए फीका रहा। इस प्रकार कराए गए निर्माण कार्यों का पंचायतों को 06  माह से भुगतान नही होने के कारण सरपंच- सचिव के साथ ग्रामीण मजदूर वर्ग भी खासे परेशान है।


     बता दें कि कोविड काल के दौरान लंबे समय से सब काम काज बंद रहने से सभी की आर्थिक हालत खराब हो चली थी। उस बुरे दौर से उबरते हुए आम जनजीवन धीरे- धीरे सामान्य हो रहा है। हालाकि कोविड संक्रमण का खतरा पूरी तरह से अभी टला तो नही है। और वर्ष का प्रमुख त्यौहार दीवाली की आ गई है जिसको लेकर तगादा दरों से सरपंच सचिव मुह छुपाने लगे है,वही रोजी- मजदूरी के सहारे अपने परिवार की गाड़ी खींचने वाले वर्गों की हालत कामधाम न मिलने से दयनीय हो चली थी। गांव के निवासी ग्रामीण अधिकतर स्थानीय स्तर पर मेहनत- मजदूरी कर पैसा कमाते है। जिस आय से वे परिवार चलाने लायक दैनिक उपयोग के आवश्यकताओं की पूर्ति करते है। ऐसे में पंचायत के निर्माण कार्यों की राशि जिला प्रशासन द्वारा रोके रखे जाने के कारण उन कार्यों में नियोजित रहने वाले गरीब ग्रामीण मजदूरों की मजदूरी राशि भी 06 माह से लंबित है। तथा अपनी मेहनताना राशि पाने की उम्मीद में वे सरपंच का चक्कर लगा रहे है। वहीं दूसरी ओर सरपंच- सचिव भी दोतरफा तकादे से मानसिक परेशानी के दौर से गुजर रहे है। इस दिशा में जिला प्रशासन को ध्यान देने की महती आवश्यकता है। ताकि उधार मटेरियल एवं मजदूरी राशि भुगतान संकट से गुजर रहे सरपंचों- सचिवों को राहत मिल सके व ग्रामीण मजदूर जनता को भी उनके कमाई का हिस्सा मिल जाए।