सुखी दाम्पत्य जीवन जीने लड़कियों/महिलाओं को ही , 20-25 साल का मायके का अनुभव त्याग कर ,सुखमय जीवन के लिए,ससुराल के नए अनुभव व संस्कार को आत्मसात करना होता है।---अशोक अग्रवाल सामाजिक कार्यकर्ता रायपुर

सुखी दाम्पत्य जीवन जीने लड़कियों/महिलाओं को ही , 20-25 साल का मायके का अनुभव त्याग कर ,सुखमय जीवन के लिए,ससुराल के नए अनुभव व संस्कार को आत्मसात करना होता है।---अशोक अग्रवाल सामाजिक कार्यकर्ता रायपुर

सुखी दाम्पत्य जीवन जीने लड़कियों/महिलाओं को ही , 20-25 साल का मायके का अनुभव त्याग कर ,सुखमय जीवन के लिए,ससुराल के नए अनुभव व संस्कार को आत्मसात करना होता है।---अशोक अग्रवाल सामाजिक कार्यकर्ता रायपुर


सक्ती से संवाददाता कन्हैया गोयल की खबर


सक्ती-सुखी दाम्पत्य जीवन पर पूछे गये प्रश्न पर एक परिचर्चा में छत्तीसगढ़ प्रांतीय अग्रवाल संगठन के चेयरमेन अशोक अग्रवाल रायपुर ने विचार व्यक्त करते हुये कहा कि लड़कियों/महिलाओं को ही  20-25 साल का मायके का अनुभव त्याग कर ,सुखमय जीवन के लिए,ससुराल के नए अनुभव व संस्कार को आत्मसात करना होता है,मात्र 10 प्रतिशत लोग हैं जो, इस छोटे से मंत्र को नही समझ पाते हैं,वे ससुराल में जाते ही पति पर,उसके विचारों पर,उसकी दिनचर्या पर,ससुराल के अन्य सदस्यों पर अपना एकाधिकार बनाने में जल्दबाजी करने लगते हैं, यहां दोनो परिवार की दिनचर्या अलग अलग होने से छोटी छोटी सी बात पर तकरार होने लगती है, इससे बचना चाहिए,इन्ही सब प्रकार की बातों को लेकर पत्नी ,पति से शिकायत करती है कि,आपका परिवार ठीक नही है, वगैरह वगैरह...

वे चाहती हैं कि, ससुराल में सब कुछ उनके अनुसार हो,जो तनाव का कारण बनता है,पति ,क्या करे?जिस परिवार में वह पला, बढ़ा... उसे कैसे गलत मान ले... फिर भी कोशिश करता है, कि सब कुछ ठीक हो जाय,आपस मे सामंजस्य बैठाता है, कुछ लोग इन 10 प्रतिशत में से भी धीरे धीरे अपनी सार्थक कोशिशो की वजह से एक दूसरे की भावनाओं का आदर करते हुए परिस्थितियों को अपने अनुकूल कर लेते है। 

परन्तु जहां,शिकवों शिकायतो का जब तक दौर समाप्त नही होता,तब तक उनका नारकीय जीवन प्रारंभ हो जाता है

उन्होंने आगे कहा कि,जबकि ,यह परिवर्तन धीरे धीरे समय के अनुसार ही,समझदारी से ही संभव है। इसे समझने की योग्यता महिलाओं में होनी ही चाहिये,जो समझती हैं, वे सुखी रहती हैं,जो नही समझती वे धीरे धीरे तनाव से घिर जाती हैं, अपना सुखी जीवन भी नारकीय कर लेती हैं,हर माँ बाप को यह बात स्वयं भी समझनी होगी और औलाद को भी समझानी होंगी