अटल बिहारी वाजपेयी के 10 फैसले जिनके आईने में इतिहास उन्हें तौलेगा :- हेमंत सिन्हा

अटल बिहारी वाजपेयी के 10 फैसले जिनके आईने में इतिहास उन्हें तौलेगा :- हेमंत सिन्हा

अटल बिहारी वाजपेयी के 10 फैसले जिनके आईने में इतिहास उन्हें तौलेगा :- हेमंत सिन्हा 


धनेश्वर बंटी सिन्हा/धमतरी-अटल बिहारी वाजपेयी जी जीवित होते तो 95 साल के हो गए होते. हालांकि वे अब नहीं हैं, लेकिन उनकी मौजूदगी भारतीय राजनीति में हमेशा रहेगी



16 अगस्त, 2018 को वाजपेयी का निधन हो गया था. उनके गुजरने के कुछ महीने बाद अब उनके जन्मदिन को भारतीय जनता पार्टी व्यापक तौर पर मना रही है,केंद्र सरकार ने इस मौके पर वाजपेयी की तस्वीर वाला 100 रुपये का सिक्का भी जारी किया है.

बतौर राजनेता अटल बिहारी वाजपेयी हर मुमकिन ऊंचाई तक पहुंचे, वे प्रधानमंत्री के तौर पर अपना कार्यकाल पूरा करने वाले पहले ग़ैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री रहे।

कभी महज़ दो सीटों वाली पार्टी रही भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में सरकार बनाने की उपलब्धि केवल अटल बिहारी वाजपेयी की भारतीय राजनीति में सहज स्वीकार्यता के बूते की बात थी, जिसे भांपते हुए राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ को भी लालकृष्ण आडवाणी को पीछे रखकर वाजपेयी को आगे बढ़ाना पड़ा था।

वाजपेयी तीन बार भारत के प्रधानमंत्री रहे, पहले 13 दिन तक, फिर 13 महीने तक और उसके बाद 1999 से 2004 तक का कार्यकाल उन्होंने पूरा किया. इस दौरान उन्होंने ये साबित किया कि देश में गठबंधन सरकारों को भी सफलता से चलाया जा सकता है।

अटल बिहारी वाजपेयी की 10 फैसले जो भारतीय राजनीति में नजर आता रहेगा- भारत को जोड़ने को योजना, निजीकरण को बढ़ावा वीनिवेश की शुरुआत, संचार क्रांति का दूसरा चरण,सर्वशिक्षा अभियान,पोखरण का परीक्षण, लाहौर-आगरा समित और करगिल-कंधार की नाकामी, पोटा कानून, संविधान समीक्षा योजना गठन,जातिवार जनगणना पर रोक,राजधर्म का पालन।