जिला उपभोक्ता आयोग जांजगीर ने बीमा धारक को दिए बीमा राशि का भुगतान करने के निर्देश

जिला उपभोक्ता आयोग जांजगीर ने बीमा धारक को दिए बीमा राशि का भुगतान करने के निर्देश

जिला उपभोक्ता आयोग जांजगीर ने बीमा धारक को दिए बीमा राशि का भुगतान करने के निर्देश


 शक्ति से संवाददाता कन्हैया गोयल की खबर


 सक्ती- तरौद निवासी नरेश अग्रवाल को हेल्थ इंश्योरेंस की अवधि में हुए सर्जरी के खर्चों का भुगतान नहीं करने पर जिला उपभोक्ता आयोग ने सर्जरी में खर्च हुए सवा पांच लाख रुपए सहित मानसिक क्षतिपूर्ति व वाद व्यय भुगतान 45 दिनों के भीतर करने का आदेश दिया है।

नरेश अग्रवाल ने नैला निवासी श्रीमती आंचल अग्रवाल पति राहुल अग्रवाल से स्टार हेल्थ एंड एलाइज कंपनी लिमिटेड की स्वास्थ्य बीमा योजना स्टार कंप्रिहेंसिव इंश्योरेंस स्कीम के तहत ₹500000 का बीमा 29 सितंबर 2016 को कराया था। योजना के तहत आवेदक नरेश को हर साल ₹33700 का प्रीमियम भुगतान करना था। नरेश लगातार प्रीमियम का भुगतान कर रहा था इसी बीच 27 दिसंबर 2018 को उसके कमर में दर्द हुआ जिसका इलाज मुंबई स्थित एक निजी अस्पताल में कराया। उक्त अस्पताल के डॉक्टरों ने जांच के बाद नरेश को सर्जरी की सलाह दी जिसके बाद नरेश की सर्जरी की गई। ओके सर्जरी में 523344 रुपए का खर्च आया। सर्जरी में हुए खर्च का क्लेम नरेश में स्टार हेल्थ बीमा कंपनी से किया लेकिन कंपनी के द्वारा प्री एक्जिस्टिंग डिजीज कहते हुए बीमा दावा खारिज कर दिया गया उसके बाद नरेश ने वकील के माध्यम से कंपनी को नोटिस भेजा जिस पर भी कंपनी अपने जिद पर अड़ी रही। बीमा दवा नहीं मिलने पर नरेश ने मामला जिला उपभोक्ता आयोग में प्रस्तुत किया। आयोग की अध्यक्ष श्रीमती तजेश्वरी देवी  देवांगन सदस्य मनरमण सिंह तथा श्रीमती मंजू राठौर ने सुनवाई करते हुए पाया कि नरेश की समस्या बीमा अवधि के दौरान ही शुरू हुई थी। इसलिए स्टार हेल्थ बीमा कंपनी को नरेश को सर्जरी में खर्च हुए राशि 523344 रुपए के साथ मानसिक क्षतिपूर्ति हेतु 20000 तथा वाद व्यय स्वरूप 2000 रु,45 दिनों के भीतर ब्याज सहित भुगतान करने का आदेश पारित किया। बीमा के पहले हुई थी जांच स्टार हेल्थ एंड एलाइज कंपनी लिमिटेड द्वारा नरेश का बीमा कराने से पहले अपने इंपैनल्ड डॉक्टरों की टीम से जांच कराया गया था। पहले जांच के बाद भी बीमा दावा भुगतान नहीं करने को उपभोक्ता आयोग ने विधि सम्मत नहीं माना। वही बीमा कंपनी द्वारा विवाह के पहले बीमारी का हवाला दिया गया था जिसका बीमा कम्पनी ने सबूत प्रस्तुत नहीं कर सके