मां से बढ़कर संसार में कोई नहीं, मां से मिलते हैं संस्कार- भारती मोदी सामाजिक कार्यकर्ता बिलासपुर

मां से बढ़कर संसार में कोई नहीं, मां से मिलते हैं संस्कार- भारती मोदी सामाजिक कार्यकर्ता बिलासपुर

मां से बढ़कर संसार में कोई नहीं, मां से मिलते हैं संस्कार- भारती मोदी सामाजिक कार्यकर्ता बिलासपुर


 भारती ने मां की महत्ता पर अपने शब्दों में व्यक्त की भावनाएं-- मैं “माँ” हूँ


  कन्हैया गोयल/शक्ति- इस संसार में जहां मां की महत्ता को लेकर लोग विभिन्न माध्यमों से अपनी भावनाएं व्यक्त करते हैं, तथा मां से बढ़कर इस संसार में कोई नहीं एवं मां से ही मिलते हैं संस्कार, इन्हीं बातों को लेकर छत्तीसगढ़ प्रदेश की संस्कारधानी बिलासपुर शहर की सामाजिक कार्यकर्ता भारती मोदी ने अपने शब्दों के माध्यम से अपनी भावनाओं को व्यक्त किया है, तथा भारती कहती हैं कि


हाँ मैं एक माँ हूँ,

मातृत्व वरदान है मेरा

स्त्री होने का अभिमान है मेरा

कोई कहता बेटी की माँ

किस्मतवाली

तो कोई कहता बेटे बिना

न बढ़े वंश बेला

पर क्या सिर्फ बेटा-बेटी ही है

माँ की पहचान

नही बिल्कुल नही

बच्चों के संस्कार होते है

एक माँ की पहचान

यदि बेटी हो तो सिखाओ

मज़बूत बनना,अपने सम्मान की

रक्षा करना

पर साथ ही सिखाओ घर को

संजोये रखना

मत सिखाओ अपने सासरे में

बात – बात पर तुनकना

संस्कारों में सिखाओ

अपने सम्मान के साथ घर को बांधे रखना

पर क्या बेटों के लिए कुछ नही?

है ना

बेटे के संस्कार बेटी से ज्यादा जरूरी है

कोई आती है उसके पीछे अपना

पिहर छोड़ के

अपने मैया , बाबुल और भैया

को छोड़ के

अपना जीवन एक अनजाने को

सौंपती है

जिस घर मे उसका नाम तक नहीं

उसे अपना मान जीवन भर

सहेजती है

लड़के को दो ऐसे संस्कार

की वो हर लड़की के

मान का करे सम्मान

क्योंकि एक आदर्श पति

हर लड़की का अधिकार है

चाहे बेटा हो या बेटी

दूसरे के जीवन को

निभाने के नही

सवारने के संस्कार दें

जो सिर्फ एक माँ ही दे सकती है

आओ इस मात्र दिवस

इस बात की शपथ ले

की सिर्फ माँ शब्द को ही नही

मातृत्व को भी सार्थक करना है

बेटा हो या बेटी

उनको संस्कारों के साथ बड़ा करना है ।।


भारती द्वारा स्वरचित इन पंक्तियों की जहां लोग प्रशंसा करते हैं, तो वहीं भारती भी कहती हैं कि वह इस संसार में आज वर्तमान समय में जो देखने को मिल रहा है इन सभी बातों को वह अपनी पंक्तियों के माध्यम से लोगों को एक संदेश देने का कार्य कर रही हैं, कि इस जीवन में जिसके पास मां है, तथा मां से बढ़कर कोई नहीं, भारती कहती हैं कि आज पूरी दुनिया में यह अनेको परिवारों में देखने को मिलता है कि लोग वृद्धावस्था होने पर अपने मां-बाप को वह स्नेह एवं प्यार नहीं देते तथा मां बाप ने उन्हें बचपन से लाड प्यार कर बड़ा किया, उसे इस जीवन में एक अच्छे संस्कार दिए, किंतु इसके बावजूद हमे मां बाप को भी वही स्नेह एवं प्यार देना चाहिए तथा जब तक वह हमारे साथ इस संसार में है हमें उनकी सेवा करनी चाहिए।