*रुक जाना नहीं तू कहीं हार के*

*रुक जाना नहीं तू कहीं हार के*

*रुक जाना नहीं तू कहीं हार के* 


 _पोषण साहू/गरियाबंद-वैश्विक महामारी के इस दौर में एक आम आदमी को विश्वास और हौसला ही तो चाहिए। हौसले के बल पर वह अपनी जिंदगी में बहुत आसानी से नया रंग भर देंगे ।जहां चारों तरफ हाहाकार और अफरा-तफरी मची हुई है ,वही जीने का जज्बा भी कम नहीं हुआ है। करोना के इस वैश्विक महामारी के काल में हर तरफ से  बेबसी और कराह सुनाई दे रही है। जीना कितना कठिन  है। लोग अपने घरों में ही दुबक कर जी  रहे हैं। उम्मीद की रोशनी तो है लेकिन कोरोना की विभीषिका और काली छाया ने  जैसे  हर उम्मीदों और हौसलों पर ग्रहण ही लगा दिया है ।फिर भी इंसान की खूबी है कि वो गिरकर उठता है ,उठकर खड़ा होता है और संभलकर दौड़ के लिए फिर तैयार होता है,इंसान बार-बार यही करता है, वह हार कर भी जीत जाता है। इस बार भी जीतेंगे। भय और आशंका के इस समंदर में अथाह गहराई है लेकिन कहीं ना कहीं तट पर आने की जिद भी हमारी ही है । 

अभी राज्य में पिछले 1 सप्ताह से कुछ राहत देखने को मिली है , संक्रमण दर 12% तक गिरकर आ गया है । यह लगातार गिरते हौसले के लिए किसी ऊंचाई से कम नहीं है।राज्य के गरियाबंद जिले की बात करें तो यहां भी कोरोना मरीजों की पॉजिटिविटी रेट में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है लेकिन यहां भी संक्रमण दर 15 प्रतिशत के आसपास है। फिलहाल बीते दिन 172 पॉजिटिव मरीज मिले थे ।जिले में  कुल 17809  मरीज पॉजिटिव मिले हैं।इनमें से अस्पताल से भी करीब 3219 मरीज डिस्चार्ज हो गए हैं। इस तरह 15400 मरीज टोटल डिस्चार्ज  भी हुए हैं जो अच्छा संकेत है। अभी 2243 सक्रिय मरीज है।  जिसमे लगातार कमी आ रही है।

 इस महामारी में 167 लोग मौत के मुंह में भी समा गए हैं । यह एक बड़ी क्षति है। लेकिन यह भी सही है की इसी अस्पताल में नई जिंदगीयों ने भी दस्तक दिया है । गरियाबंद में ही अभी तक 9 जिंदगीयों ने जन्म लिया है । यह  घोर अंधेरे के  बीच एक अदद रोशनी की आस है, एक नाउम्मीद के बीच उम्मीद की किरण है।यह भी  सत्य है की प्रशासन ने लोगों की सुरक्षा और टीकाकरण के लिए  सारा जोर लगा दिया है। लगातार टीकाकरण जारी है जानकारी के मुताबिक फ्रंटलाइन वर्कर और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को लगभग 90% से अधिक टीकाकरण किया जा चुका है 

वही 45 साल से ऊपर के लोगों को भी 78 प्रतिशत टीका पूर्ण हो गया  है ।उम्मीद है जनप्रतिनिधि, आम जनता और प्रशासन के समन्वय से हम यह जंग जीत जाएंगे , और जीत रहे हैं। फिर से एक खुशनुमा वातावरण में  हम सांस ले पाएंगे ।इस विकट संकट से निकलने की आहट सुनाई दे रही है। बस हम एक दूसरे को हौसला देते रहें और कोविड-19 प्रोटोकाल का पालन करते रहें । हम जब भी घर से बाहर निकले मास्क पहने ,लोगों से मिलते समय 2 गज की दूरी का पालन करें, खाने से पहले और किसी भी चीज को छूने के बाद हाथों की  साबुन से सफाई करें। फिर देखिए कोरोना कैसे मुंह मोड़कर लौटने पर मजबूर होता है। एक बार फिर हम इस स्वस्थ  वातावरण में उन्मुक्त होकर सांसे ले पाएंगे, अपनों को गले लगा पाएंगे और फिर से जी भर कर मुस्कुरा पाएंगे ।