पर घर के बेटी

पर घर के बेटी

पर घर के बेटी



कइ घव हमन अपन पारा परोस,नइते अपने घर म कहत सुनथन कि बिहाव के बाद बेटी पर घर के हो जाथे, अउ  ससुराल वाला मन बहु ल ये कथे कि तय ह पर घर के हरस।का सिरतोन म बेटी बहु पर घर के आय?जेन बेटी ह नानपन ले जवान उमर तक अपन दाई ददा के अचरा के छंइहा म पलिस,जेन दाई ददा अपन बेटी के सबो सही गलत के फइसला ओकर पालन पोसन करीस आज बिहाव के बाद पर घर के कइसे हो सकत हे?जब बेटी के आघु म दाई ददा या सास ससुर ये बात ल कइथे त  सोचव ओखर उपर का बितत होही,ओखर मन के भावना ल टमड़ के देखव ये नानकुन गोठ हर ओखर हिरदे म पथरा कचारे अस लागथे।जब दुनो परवार हर ओला पराया  कइथे त ये संसार म ओखर घर कोन हरय अउ ओखर अपन परिवार कोन हरय?सिरतोन कहंव त बिहाव के बाद घलो बेटी उपर दाई ददा के ओतकेच हक होथे,फेर  सही समय म अउ सीमा म रहिके ही हक जताय ल परथे। 

फेर एक बात के धियान रखना चाही कि हक सिरिफ ओकर बेटी उपर होथे ओखर गृहस्थी अउ ससुराल के निजी मामला म दखल दे के कोनो हक नइहे।काबर कि आजकल देखथन  कि बेटी के ससुराल के हर छोटकुन बात म दाई ददा दखल देथे खासकर के दाई ह,अइसन म रिस्ता नता ह टुटे ल धर लेथे।

बेटी ल घलो ये  बात के सुरता रखना चाही कि अपन घर के नान नान गोठ ल दाई ददा करा नइ गोठियाना चाही।

आजकल मोबाईल के जमाना आगे हे एक कन बात म घरवाला नइते सास ससुर संग झगरा होइस ताहन फट ले मइके म फोन लग जथे,अउ वहुती ले दाई ददा के पन्दोली मिल जाथे ताहन का पुछना हे नानकुन गोठ हर हाईकोट(बड़े झगरा) पहुच जाथे।अउ आखरी म ताहन टुटादान के नउबत आ जथे।

त जिनगी काखर बरबाद होथे,घर काकर उजरथे,बेटी के।

त बेटी ल घलो चाही कि घर के नान नान गोठ ल मइके म झन गोठियाय।

अउ जेन सास ससुर  हर बेरा बहु ल कोसथे ओखर हर गलती म ओखर दाई ददा ल जिम्मेदार ठहराथे वहु तो कखरो बेटी होही,ओकरो महतारी ह तो ओतकेच पीरा म बेटी ल जनम दे होही जतका ओकर सास हर अपन बेटा ल जनम दिस।

सास ससुर ल चाही कि भुल के घलो ।