मोदी द्वारा किए जा रहे एसेट मोनिटाइजेशन या निजीकरण देश के लिए विध्वंशक-संदीप दुबे

मोदी द्वारा किए जा रहे एसेट मोनिटाइजेशन या निजीकरण देश के लिए विध्वंशक-संदीप दुबे

मोदी द्वारा किए जा रहे एसेट मोनिटाइजेशन या निजीकरण देश के लिए विध्वंशक-संदीप दुबे

78 वर्षों में जनता के पैसों से बनाए गए संपत्ति को मोदी अपने मित्रों के कल्याण के लिए बेचने पर आमदा


ब्यूरो-प्रदेश काँग्रेस विधि विभाग के अध्यक्ष संदीप दुबे ने बताया की केंद्र सरकार अपने निजी स्वार्थ के लिए एवं मित्र औद्योगिक घरानो को मदद पहुचानें के लिए देश की 6,00,000 करोड़ रूपय की देश की मूल्यवान संपत्ति को बेचने का खतरनाक फैसला लिया है, जिसमें सड़क, रेल, खनिज, खदान, बन्दरगाह, दूरसंचार, बिजली, गैस, हवाई अड्डे, खेल स्टेडियम और भी कई संस्थान शामिल है, जबकि केंद्र की मोदी सरकार अपने 7 वर्षों के कार्यकाल में जिस प्रकार से पेट्रोल, डीजल, गैस के दामों में बेतहाशा वृद्धि कर प्रतिवर्ष 25,00,000 करोड़ रूपय का अतिरिक्त आय प्राप्त किया है, जिसे आम जनता के जीवन स्तर सुधार करने के बजाय, आम जनता की जेब से निजीकरण कर पैसा निकालने की तरकीब कर रही है। जिस प्रकार से देश में गिरती सकल घरेलू उत्पाद गिरने और महंगाई के वृद्धि से पीड़ित भारत की जनता के घावों पर नमक छिड़कने के लिए तरह तरह के उत्पादों पर कर लगाकर अपने मित्र उद्योगपतियों के खजाना को भरने का काम कर रही है, साथ साथ राष्ट्रीय मित्रिकरण योजना के नाम पर रेल बेचने जा रही है, जो कि भारत कि अर्थव्यवस्था कि ऋण कि हड्डी होने के साथ साथ भारत देश को एक सूत्र  में बांधने का कार्य करती है जिसे निजी हाथों में भेजकर देश कि धर्म निरपेक्षता पर कुठाराघात करने कि योजना है। जिसमें 400 रेल्वे स्टेशन, और 150 ट्रेनों को 30 वर्षों के लिए लीज में दिये जाने कि योजना है। उसी प्रकार पावर ट्रांसमीशन लाइन में 42,300 सर्किट किलो मीटर, नेशनल गैस पाइप लाइन से 8,000 किलो मीटर, पावर जनरेशन से 5,000 मेगा वाट, ऑइल पाइप लाइन से 4,000 किलो मीटर,  टेलिकाम सेक्टर में बीएसएनएल एवं एमटीएनएल टावर को विक्रय करने जा रही है। साथ ही साथ 160 कोल माइनिंग प्रोजेक्ट एवं 21 एयरपोर्ट, 31 बन्दरगाह सहित देश के दो प्रमुख स्टेडियम को बेचने जा रही है,  मोदी ने इस योजना का नाम राष्ट्रीय मित्रिकरण योजना सिर्फ अपने अद्योगिक मित्रों को लाभ पहुचाने के लिए दिया है। आने वाले समय मे काँग्रेस से दिशानिर्देश मिलने के बाद इस संबंध मे आंदोलन एवं जरूरत पड़ने पर न्यायालयीन लड़ाई लड़ी जाएगी।