मड़ेली में पं. दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती धूमधाम से मनाया

मड़ेली में पं. दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती धूमधाम से मनाया

मड़ेली में पं. दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती धूमधाम से मनाया




छुरा- जनपद पंचायत छुरा अन्तर्गत ग्राम मड़ेली में महावीर चौक गायत्री मंदिर प्रांगण में पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती बहुत धूम-धाम से मनाया गया। उपाध्याय जी की छायाचित्र पर गुलाल-अगरबत्ती और माल्यार्पण कर पूजा अर्चना की। उपाध्याय जी की जयंती को पूरे देशभर में दिनांक 26/09/2021को उनकी 105वीं जयंती मनाई गई है। इस मौके पर गांव से लेकर शहर तक तमाम दिग्गजों ने उन्हें नमन किया है।   25 सितंबर 1916 को दीनदयाल का यूपी के मथुरा में जन्म हुआ था। ग्राम मड़ेली के छोटे से लेकर बड़े दिग्गजों  ने कहा कि 'एकात्म मानव दर्शन के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी को उनकी जयंती पर शत-शत नमन। उन्होंने राष्ट्र निर्माण में अपना जीवन समर्पित कर दिया। उनके विचार देशवासियों को सदैव प्रेरित करते रहेंगे।

छत्तर सिंह ठाकुर ने भी किया नमन, बोले सदैव जनकल्याण के लिए करते रहेंगे प्रेरित ।                     ‌                पूर्व ज.पं.अध्यक्ष मीरा ठाकुर ने पंडित जी को नमन किया है। उन्होंने कहा कि,' दूरदर्शी राजनीतिज्ञ पं. दीनदयाल उपाध्याय जी ने समय समय पर विभिन्न चुनौतियों व समस्याओं के निराकरण के लिए अपने विचार-दर्शन से देश का मार्गदर्शन किया। पंडित जी के एकात्म मानववाद व अंत्योदय के मंत्र सदैव हमें जनकल्याण व राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करते रहेंगे। उन्हें कोटिशः नमन। 

संदीप कुमार पाण्डेय(मंडल अध्यक्ष) ने कहा एकात्म मानववाद जैसे प्रगतिशील आर्थिक विचार के प्रणेता एवं अंत्योदय के लिए आजीवन काम करने वाले महामानव पण्डित दीनदयाल जी को उनकी जयंती पर कोटि कोटि नमन। 

प्रकाश सिन्हा(महामंत्री) ने कहां पं. दीनदयाल उपाध्याय जी के विचार और दर्शन भारत की आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करते रहेंगे।

    पूर्व शक्ति केंद्र प्रभारी लाला राम यदु ने कहा कि उपाध्याय एक ऐसे राजनेता रहे हैं जिन्होंने न केवल स्वंम भारत को भारत के दृष्टिकोण से जानने समझने और देखने की दृष्टि विकसित की अपितु बहुतेरों को भी वैसी ही दृष्टि प्रदान की। उन्हें शत-शत नमन।

 गोविन्द यादव ने कहा- उपाध्याय का मानना था कि भारत के स्वदेशी आर्थिक विकास के लिए बहुत जरूरी है कि उसके केन्द्र में मानव को रखा जाए, यह विचारधारा समाजवाद और पूंजीवाद दोनों से हटकर थी. उसका मानना था कि जब तक कमजोर वर्ग का उत्थान नहीं होगा,देश का विकास संभव नहीं है। उनकी जयंती पर उन्हें नमन किया। इस दौरान - वेशनारायण ठाकुर ,बिसहत निर्मलकर, मनहरण सिन्हा, जीवन टाण्डे, हैप्पी गुरुदत्ता, गुलशन सिन्हा आदि उपस्थित रहे।