बोर्ड परीक्षाओं में कोरबा के खराब प्रदर्शन से सांसद प्रतिनिधि प्रशांत मिश्रा खफा...! कहा- बाहर से आकर हाजिरी दिलाने वाले प्रचार्यों एवं शिक्षकों पर लगाम जरूरी

बोर्ड परीक्षाओं में कोरबा के खराब प्रदर्शन से सांसद प्रतिनिधि प्रशांत मिश्रा खफा...! कहा- बाहर से आकर हाजिरी दिलाने वाले प्रचार्यों एवं शिक्षकों पर लगाम जरूरी

बोर्ड परीक्षाओं में कोरबा के खराब प्रदर्शन से सांसद प्रतिनिधि प्रशांत मिश्रा खफा...! कहा- बाहर से आकर हाजिरी दिलाने वाले प्रचार्यों एवं शिक्षकों पर लगाम जरूरी

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दीपक शर्मा/कोरबा:- कुछ दिन पूर्व सीजीबीएसई 10 वीं एवं 12 वीं बोर्ड का परीक्षा परिणाम घोषित किया गया, जिसमे 10 वीं 12 वीं की मेरिट लिस्ट में कोरबा का नाम न आने पर शिक्षा विभाग को आड़े हाथों लेते हुए सांसद प्रतिनिधि एवं गौ- सेवा आयोग छत्तीसगढ़ शासन के सदस्य प्रशांत मिश्रा ने जमकर भड़ास निकाली और कहा कि जिला शिक्षाधिकारी उन प्रचार्यों एवं शिक्षकों पर लगाम कसे, जो मुख्यालय में न रहकर बिलासपुर एवं दूर दराज से आकर सिर्फ हाजिरी दिलाते है और मुफ्त की तनख्वाह उठा रहे है। उन्होंने कलेक्टर से भी अपील की है कि शिक्षा विभाग में पदस्थ ऐसे अधिकारियों पर लगाम कसे जो अन्य जिलों से अपडाउन कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर रहे है। श्री मिश्रा ने कोरबा जिले से किसी भी विद्यार्थी का टॉप टेन में न आने को दुर्भाग्यजनक बताया और कहा कि आकांक्षी एवं आदिवासी बाहुल्य जिला होने के नाते कोरबा में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने व हर संसाधन जुटाने का प्रयास शासन और प्रशासन कर रहा है, इसके बावजूद यहां के शिक्षकों की कार्यशैली सुधर नही रही है। जिसके कारण शिक्षण में गिरावट आयी है। सांसद प्रतिनिधि प्रशांत मिश्रा ने बताया कि शासन एवं प्रशासन द्वारा शहरी एवं वनांचल क्षेत्रों में शिक्षा संसाधन के साथ पर्याप्त मात्रा में शिक्षकों की व्यवस्था की गई है, लेकिन देखने मे आ रहा है कि दूर दराज के विद्यालयों में शिक्षक समय पर पहुचते नही जिससे शिक्षा का स्तर डगमगा गया है। उन्होंने सभी हायर सेकेंडरी एवं हाईस्कूल में पूर्णकालिक प्रचार्यों की नियुक्ति करने की मांग कलेक्टर एवं डीईओ से की है, ताकि शिक्षा का स्तर सुधारा जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि शासन एवं प्रशासन से करोड़ो रुपए की स्वीकृति विद्यालयों के सुधार कार्य के लिए मिलती है, साथ ही डीएमएफ फंड का उपयोग भी शिक्षा स्तर को सुधारने के लिए किया जा रहा है, इसके बावजूद कोरबा जिले का प्रदर्शन काफी खराब रहा। श्री मिश्रा ने डीईओ को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि डीईओ आने वाले वर्षों के लिए अपनी कार्यशैली को सुधारें और सतत शिक्षा स्तर की मॉनिटरिंग करें तथा सभी बीईओ भी इस ओर ध्यान दें ताकि भविष्य में कोरबा जिला का शिक्षा स्तर पूरे प्रदेश में मॉडल के रूप में सामने आए। उन्होंने निजी विद्यालयों से भी मेरिट लिस्ट में न आने पर संस्था प्रमुखों को भी फटकार लगाई और कहा है कि विद्यालय को फैक्ट्री न बनाएं।