*देखते ही देखते पानी में बह गया सरकार का दो करोड़, दो करोड़ के साथ लाखों का फसल भी बहा, जब डूमरकोना का फूटा बांध देखने पहुँचे राष्ट्रीय संयोजक गणेश राम भगत, पहुँचते ही ग्रामीणों ने जोरदार नारे और पारंपरिक गीत से किया स्वागत और फूटे बांध में ही शुरू हो गई जनसभा, एकजुट ग्रामीण लामबंद होकर कर रहे बड़े आंदोलन की तैयारी

*देखते ही देखते पानी में बह गया सरकार का दो करोड़, दो करोड़ के साथ लाखों का फसल भी बहा, जब डूमरकोना का फूटा बांध देखने पहुँचे राष्ट्रीय संयोजक गणेश राम भगत, पहुँचते ही ग्रामीणों ने जोरदार नारे और पारंपरिक गीत से किया स्वागत और फूटे बांध में ही शुरू हो गई जनसभा, एकजुट ग्रामीण लामबंद होकर कर रहे बड़े आंदोलन की तैयारी

*देखते ही देखते पानी में बह गया सरकार का दो करोड़, दो करोड़ के साथ लाखों का फसल भी बहा, जब डूमरकोना का फूटा बांध देखने पहुँचे राष्ट्रीय संयोजक गणेश राम भगत, पहुँचते ही ग्रामीणों ने जोरदार नारे और पारंपरिक गीत से किया स्वागत और फूटे बांध में ही शुरू हो गई जनसभा, एकजुट ग्रामीण लामबंद होकर कर रहे बड़े आंदोलन की तैयारी......

राकेश गुप्ता/जशपुर-जिले में एक बड़ा सवाल इन दिनों चर्चा में है कि क्या जशपुर जिला भ्रष्टाचार  का गढ़ बन चुका है। जिला चिकित्सालय में हुए 12 करोड़ के भ्रष्टाचार का जीन अभी शांत ही नहीं हुआ था कि सन्ना तहसील के ग्राम डूमर कोना और ग्राम भट्ठा में एक वर्ष पूर्व ही जल संसाधन विभाग के द्वारा  मनरेगा और जिला खनिज न्यास की राशि से बनाये गए मिट्टी के बांध साल पूर्ण होने के पहले ही धाराशायी हो गये। दोनों बांध की लागत लगभग 2 करोड़ बताई जा रही है तो सीधे यह कहा जा सकता है कि सरकार का दो करोड़ पानी मे बह गया। जैसे ही बांध फूटने की सूचना अखिल भारतीय जनजातीय सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक एवम पूर्व मंत्री श्री गणेश राम भगत को मिली वे लाव लश्कर के साथ दोनों स्थानों पर पहुँचे और प्रत्यक्ष रूप से फूटे हुए डेम का मुआयना भी किया साथ ही प्रभावित ग्रामीणों से भी मुलाकात कर डेम के कार्यप्रणाली ओर चर्चा किए ग्रामीणों ने उन्हें बताया कि डेम निर्माण का कार्य जल संसाधन विभाग के अधिकारी रात्रे के द्वारा कराया गया है जिसे डूमर कोना में लक्ष्मण यादव नामक व्यक्ति को ठेके पर दिया गया था । पूरा कार्य मनरेगा के तहत हुआ किन्तु आज तक कई मजदूरों को मजदूरी भुगतान भी नही किया गया है । ग्रामीणों ने यह भी बताया कि लक्ष्मण यादव के द्वारा मनरेगा मजदूरों से डेम के बगल में स्थित खेत मे मिर्ची  लगवाने के कार्य कराया जा रहा था तथा डेम निर्माण कार्य जे सी बी और ट्रेक्टर के माध्यम से किया गया था ।श्री गणेश राम भगत ने बताया कि उनके मंत्रित्व के कार्य काल मे भी कई मिट्टी के डेम बनाये गए थे दरअसल ये डेम ग्रामीण पद्धति से मजदूरों के द्वारा हाँथ से बनाये जाने हेतु प्रस्तावित किए गए है जिसमें कार्य स्थल पर लगभग 3 से 4 फिट के नींव खोदे जाते हैं और उक्त नीव में स्थानीय नगरा मिट्टी की लोई हाँथ से बनाकर नीव में भरा जाता है और ऐसा करते हुए कम से कम 5 फिट ऊंची दीवार बनाई जाती है और उसके बाद उसके ऊपर मिट्टी भरा जाता है ।यह पूरी प्रक्रिया ठीक उसी तरह से की जाती है जैसे ग्रामीण मिट्टी का मकान बनाते हैं ।इस तकनीक को मनरेगा के तहत बनाने के पीछे का आशय भी यही है कि अधिक से अधिक ग्रामीण मजदूरों को काम मिल सके और मजबूत डेम का निर्माण भी हो सके ।किन्तु इन दोनों स्थलों में ठेकेदार और विभाग के द्वारा लापरवाही पूर्वक विधि विरुद्ध ढंग से जेसीबी एवम ट्रेक्टरों का उपयोग किया गया है ।और जनता के पैसों का दुरुपयोग करते हुए बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया गया है इस सम्बंध में सम्बंधित अधिकारियों से बात की जाएगी और उक्त घटनामें थाने में रिपोर्ट भी दर्ज करने को कहा जायेगा और यदि प्रशासन गम्भीरता पूर्वक कार्यवाही नही करता है तो जनजातीय सुरक्षा मंच कलेक्ट्रेट के सामने धरने पर बैठेगा।




जानिये क्या है मामला:- 


सन्ना क्षेत्र के ग्राम पंचायत डुमरकोना के जोकारी नाला में बांध बनाने  ग्रामीणों के द्वारा सालों से मांग की जा रही थी, जिसका मुद्दा ब्लाक संघर्ष समिति सन्ना ने भी कई बार उठाया था। जिसके बाद सरकार बदली और वहां जल संसाधन विभाग और मनरेगा योजना के तहत जोकारी नाला मे मिट्टी बांध और नहर बनाने  लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की लागत का कार्य स्वीकृत हुआ।  कार्य बीते छः माह पहले ही पूर्ण किया गया है। वहीं बीते चार दिन पहले इतने बड़े प्रोजेक्ट का बनाया गया बांध टूट गया। जिससे कई प्रकार की बड़ी जनहानी भी होने से बची। परन्तु उसमें सामने आए सैकड़ों एकड़ लहलहाते हुए किसानों की फसल को चौपट कर दिया। ठीक इसी प्रकार ग्राम पंचायत उकई के आश्रित ग्राम भट्ठा में भी दो वर्ष पहले ही लगभग 47 लाख के लागत से मिट्टी बांध बनाया गया था।जो कि ग्रामीण बताते हैं कि यह बांध दो साल में दो बार बह गया है। जिससे कई किसानों की जान भी जाते जाते बची और किसानों के फसल को पूरी तरह चौपट कर किसानों को बर्बाद कर दिया जहां खेतों में लहलहाते फसल बह गयी और खेत भी बंजर हो गया।


आपको यह भी बता दें कि गांव के मजदूर बताते हैं इन दोनों बांध के कार्यों में किये गये काम का मजदूरी भी अब तक कुछ मजदूरों को नही मिला है।वहीं ग्रामीणों का यह भी कहना है कि घटिया तरीके से निर्माण करने से बांध बही है।