वीर रस.....नर्मदा दीवान "नैना"

वीर रस.....नर्मदा दीवान

वीर रस.....नर्मदा दीवान "नैना"


झन होवय कभु छत्तीसगढ़ म,  कोनो अबला नारी।

बनके लछ्मीबाई धरलेबो,  तलवार संगवारी।

आंखी देखाही कोनो त,हम आंखी नोच लेबो।

हार नइ मानन जिंनगी ले ये मन म सोच लेबो।

लड़बो जी मैदान म, हमन सउहत कछोरा भीड़ के।

आके देखय अब कोनो रावण पार लछमण लकीर के।

नइ सहन अब कोनो हमर लाज म नज़र गड़ाही।

पापी ल सजा देवाके रहिबो त जीवरा हमर जुड़ाही।

अहंकारी भैरव हर करिस हे,भारी अत्याचारी।

नाश करे बर आइस दाई, करके बघवा सवारी।

कलयुग म जी छावत हे सब डाहर, भारी अत्यचार।

धरे ल परही चण्डी रूप करे, बर पापी के संघार।

उठव उठव अब नारी शक्ति ल, मिलके सबो जगाबो।

आंसु पोछ लड़ अपन हक बर, तभे मान ल पाबो।


नर्मदा दीवान "नैना"

सुकुलबाय( सिरपुर)महासमुंद छ.ग.