उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व के ग्रामीणों क्षेत्रो की दुर्दशा का समाचार प्रकाशित करने के लिए पत्रकार रुपेश साहू का “प्रकृति एवं संस्कृति रिसर्च सोसाईटी” के द्वारा किया जाएगा सम्मान

उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व के ग्रामीणों क्षेत्रो की दुर्दशा का समाचार प्रकाशित करने के लिए पत्रकार रुपेश साहू का “प्रकृति एवं संस्कृति रिसर्च सोसाईटी” के द्वारा किया जाएगा सम्मान
उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व के ग्रामीणों क्षेत्रो की दुर्दशा का समाचार प्रकाशित करने के लिए पत्रकार रुपेश साहू का “प्रकृति एवं संस्कृति रिसर्च सोसाईटी” के द्वारा किया जाएगा सम्मान


छुरा ग्रामीण - उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व के जंगल के अंदर बसे ग्रामो में राज्य निर्माण के बाद पिछले 19 वर्षो मे जितना विकास यहां होना चाहिए था नहीं हो पाया है|  यहां स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, सड़क, पेयजल जैसी  बुनियादी सुविधाओं के लिए लोगो को तरसना पड़ रहा है | वहा के ग्रामीण आजादी के 7 दशक बाद भी अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे है पर आज तक उन्हें मुलभुत सुविधाए नहीं मिल पाया है |

                  उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व के ग्रामीण क्षेत्रो की समस्याओं के संबंध में मैनपुर के युवा और ऊर्जावान  दैनिकभास्कर के पत्रकार रुपेश साहू के द्वारा लगातार समाचार प्रकाशित कर समस्याओं को उठाया जा रहा है और शासन प्रशासन को अवगत कराया जा रहा है | उक्त उत्कृष्ट कार्य के लिए “प्रकृति एवं संस्कृति रिसर्च सोसाईटी” के द्वारा पत्रकार रुपेश साहू का सम्मान किया जाएगा |


                  “प्रकृति एवं संस्कृति रिसर्च सोसाईटी” के उप संचालक इतेश सोनी ने बताया की पत्रकार रुपेश साहू के द्वारा उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व के जंगल के अंदर बसे ग्रामो की दुर्दशा के संबंध में समाचार प्रकाशित किये जाने से शासन प्रशासन तक बात पहुची है , जिसके लिए रुपेश साहू बधाई के पात्र है | जल्द ही कार्यक्रम का आयोजन कर पत्रकार रुपेश साहू ओ सम्मानित किया जाएगा |



उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व के ग्रामीण क्षेत्रो की समस्याओं के संबंध में रुपेश साहू द्वारा प्रकाशित समाचार 


स्कुल नहीं होने से बच्चो को 30 किमी दूर पढ़ने जाना पड़ता है

उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व के ग्रामो में हाईस्कूल नही होने के कारण यहा के छात्र छात्राओं को प्रतिदिन 30 किलोमीटर दूर सायकल के सहारे पढाई करने आना पडता है |  सबसे ज्यादा परेशानी इन ठंड के दिनों में होती है शाम 4 बजे स्कूल के छुटटी होने पर घर पहुचने तक अंधेरा छा जाता है | लम्बे समय से हाईस्कूल की मांग किया जा रहा है परन्तु आज तक उनकी मांगे नहीं सुनी गयी है

आज तक नहीं लग पाई है बिजली, लालटेन के सहारे जीने मजबूर है ग्रामीण

उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व के ग्रामो में आज तक बिजली नहीं लगने से इन ग्रामो में शाम होते ही धुप्प अंधेरा छा जाता है | पुरा क्षेत्र अंधेरे के आगोश में समा जाता है आज भी 21वीं सदी मे यहां के लोगो को रात के अंधेरे को दूर करने के लिए लालटेन का सहारा लेना पड़ रहा है और इन लालटेनो मे रौशनी के लिए मीलो दूरी तय करने के बाद दो लीटर मिट्टी तेल नसीब होता है | इन अंतिम ग्रामो से उड़ीसा के ग्राम भी नजर आते है लेकिन उडीसा के उन ग्रामो मे बिजली चकाचक जलती नजर आती है परन्तु इनके गावो में अन्धेरा छाया होता है |

ग्रामीणों को नहीं मिलती सरकारी सुविधाए, ईलाज और राशन के लिए उड़ीसा पर रहते है निर्भर

उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व के ग्रामो में लोगो को स्वास्थय और राशन के लिए आज भी उड़ीसा पर निर्भर रहना पड़ता है, सरकार द्वारा गांवों के विकास के बडे बडे दावे किये जाते हैं लेकिन वास्तव में ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को शासन की योजनाओं का लाभ मिल पा रहा हैं या नहीं इसे देखने वाला कोई भी जिम्मेदार इस ओर झांकने तक नही आतें हैं |

नदियों में पुल नहीं होने से ग्रामीणों और स्कूली बच्चो को होती है परेशानी

उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व के ग्रामो मे पुल निर्माण नही होने के कारण आदिवासी क्षेत्र के स्कूली बच्चो को जान जोखिम मे डालकर स्कूल तक इन नदी नालो को पार कर पढाई करने आना मजबुरी बन गया है | नदी में पुल निर्माण की मांग लम्बे समय से किया जा रहा है पुल नही होने के कारण इस क्षेत्र के हाईस्कूल ,मिडिल स्कूल के छात्र छात्राओ को इस नदी को पार कर स्कूल तक पहुचना पड रहा है |